उप्र: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई करने के प्रति अनिच्छा जताई

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उप्र: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई करने के प्रति अनिच्छा जताई

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  • Publish Date - February 14, 2026 / 01:02 AM IST,
    Updated On - February 14, 2026 / 01:02 AM IST

लखनऊ, 13 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने शुक्रवार को जमानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल ही में की गई कुछ टिप्पणियों का उन पर ‘बेहद निराशाजनक और भय उत्पन्न करने वाला’ प्रभाव पड़ा है।

न्यायाधीश ने राकेश तिवारी द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से उनसे जमानत याचिकाओं की सुनवाई का दायित्व वापस लेने का आग्रह किया।

न्यायमूर्ति भाटिया ने कहा, “ यह सब जानते हैं कि ऐसा कोई न्यायाधीश नहीं है जो यह दावा कर सके कि आदेश को कभी रद्द नहीं किया गया या उसमें दखल नहीं दिया गया और मुझे उच्चतम न्यायालय के निर्णयों को पढ़ने से यह भी लगता है कि जमानत देने वाले आदेश में साफ तौर पर दखल दिया गया था। हालांकि उच्चतम न्यायालय द्वारा आदेश में खासकर पैरा चार और 29 में की गई टिप्पणियों का मुझ पर बहुत ज्यादा मनोबल गिराने वाला और डरावना असर पड़ा है।”

उच्चतम न्यायालय ने नौ फरवरी को चेतराम वर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर यह फैसला दिया था, जिसके बाद यह घटनाक्रम सामने आया।

वर्मा ने न्यायमूर्ति भाटिया द्वारा 10 अक्टूबर, 2025 को दी गई जमानत को चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने उस मामले में दहेज हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दी थी।

आरोपी की पत्नी की मौत दम घुटने के कारण हुई थी।

आरोपी 27 जुलाई, 2025 से जेल में था और जमानत याचिका में उल्लिखित कारकों के अनुसार उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं था।

न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए टिप्पणी की, “10 अक्टूबर, 2025 का विवादित आदेश अब तक के सबसे चौंकाने वाले और निराशाजनक आदेशों में से एक है।”

न्यायालय ने सवाल उठाया कि दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते समय उच्च न्यायालय ने किन बातों को आधार बनाया।

न्यायालय ने जमानत आदेश को रद्द करने के बाद निर्देश दिया कि जमानत आदेश पारित करने के तरीके के संबंध में समीक्षा के लिए निर्णय की एक प्रति इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजी जाए।

न्यायमूर्ति भाटिया ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि वह भविष्य में जमानत संबंधी मामलों की सुनवाई नहीं करना चाहते और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि उन्हें ऐसे मामले सुनवाई के लिए आवंटित न किए जाएं।

भाषा सं सलीम जितेंद्र

जितेंद्र