पीलीभीत, 13 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में शासकीय सहायता प्राप्त एक कॉलेज में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर फर्जी बिल बनाकर 98 बार सरकारी खजाने से एक करोड़ से ज्यादा रुपये निकाले। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया, जब बैंक ऑफ बड़ौदा ने बचत खाते में संदिग्ध लेन-देन देखा और 65.53 लाख रुपये की राशि पर रोक लगा दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी यूपीआई के जरिए पहले ही 36.41 लाख रुपये निकाल चुका था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी इल्हाम शम्सी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त था लेकिन वह जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में लिपिक के तौर पर कथित रूप से काम कर रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने जून 2024 में अपनी पत्नी अर्शी खातून के नाम पर एक बचत खाता खोला और उसी साल सितंबर से उसमें धन डालना शुरू कर दिया।
पुलिस ने बताया कि बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि सितंबर 2024 और 17 दिसंबर 2025 के बीच उसने 98 बार में 1.1 करोड़ रुपये निकाल थे।
अधिकारियों के मुताबिक, जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने 17 दिसंबर 2025 को मामला सामने आने के बाद जांच के आदेश दिये और मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में तीन सदस्यों की समिति बनाई।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया, “पांच फरवरी को जिला विद्यालय निरीक्षक को रिकॉर्ड मांगने के लिए एक नोटिस जारी किया गया था। पहली नजर में कई गड़बड़ियां सामने आईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”
अधिकारियों ने बताया कि वेतन और दूसरे बिल हर महीने जिला विद्यालय निरीक्षक के हस्ताक्षर से कोषागार में भेजे जाते हैं।
एक अधिकारी ने बताया, “आरोपी को प्रक्रिया के बारे में पता था और उसने अंतरण को आसान बनाने के लिए कथित तौर पर जाली बिल तैयार किये।”
जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया, “मैंने चार महीने पहले कार्यभार संभाला था और मुझे उनके पहले के क्लर्क वाले काम के बारे में पता नहीं था।”
उन्होंने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
भाषा सं. सलीम जितेंद्र
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