लखनऊ, चार अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को मानसून सत्र के दूसरे दिन मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों के हंगामे के बीच उप्र लोकसेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक, 2026 समेत कुल 11 विधेयक पारित किये गये।
विधानसभा में मंगलवार को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर सपा सदस्यों ने पूरे दिन हंगामा किया। उनके हंगामे के बीच सरकार ने 11 विधेयकों को पेश किया और उसे बहुमत के आधार पर पारित करा लिया।
उप्र लोकसेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक, 2026 में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की आयु सीमा बढ़ा दी गई है। उप्र राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत देश-विभाजन के बाद राज्य के जिलों में बसे शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक दिया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सपा सदस्यों से लगातार अनुरोध किया कि ये विधेयक बहुत महत्वपूर्ण हैं और आप लोग इस पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन सपा सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने उप्र लोकसेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक 2026 सदन के पटल पर पेश किया और उसे पारित कराने का भी प्रस्ताव रखा। महाना ने विधेयक के पक्ष में सदस्यों की संख्या अधिक होने से इसे पारित करने की घोषणा की।
राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ा दी है।
अध्यक्ष की अधिकतम आयु अब 65 के बजाय 67 वर्ष होगी जबकि उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए 62 वर्ष के बजाय 65 वर्ष की उम्र तक पद पर बने रहेंगे।
इसके अलावा सदन में अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026, रजिस्ट्रेशन (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026, उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय विधेयक, 2026, भारतीय स्टाम्प (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026, उत्तर प्रदेश दण्ड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक, 2026, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 विधेयक के पक्ष में सदस्यों के बहुमत होने से इनको पारित करने की घोषणा की।
उप्र राजस्व संहिता (द्वतीय संशोधन) विधेयक, 2026 में प्रावधान किया गया है कि आजादी के बाद भारत के बंटवारे और पाकिस्तान के निर्माण तथा 1971 में पाकिस्तान-बांग्लादेश बंटवारे के बाद वहां से हजारों विस्थापित परिवारों को उस समय उपलब्ध स्थानों पर राज्य के विभिन्न जिलों में बसाया गया।
पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर एवं बिजनौर जिलों में सरकार ने विधेयक के जरिये इन विस्थापित परिवारों को उनकी जमीन पर मालिकाना हक देने का प्रावधान किया है।
भाषा आनन्द
राजकुमार
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