उत्तर प्रदेश: राजस्व मामलों में लापरवाही के आरोप में पांच तहसीलदार निलंबित, 13 को नोटिस

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उत्तर प्रदेश: राजस्व मामलों में लापरवाही के आरोप में पांच तहसीलदार निलंबित, 13 को नोटिस

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 09:34 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 09:34 PM IST

लखनऊ, आठ सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश में राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों के समयबद्ध निस्तारण में प्रगति न मिलने पर पांच तहसीलदारों को निलंबित किया गया है, जबकि 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की ओर से 29 अगस्त को राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में यह कार्रवाई की गई है।

बयान के मुताबिक, सात सितंबर को राज्य की सभी राजस्व अदालतों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल मुकदमों की तहसीलवार और अधिकारीवार समीक्षा की गई थी।

बयान के अनुसार, निलंबित अधिकारियों में अमित यादव (तहसीलदार, संडीला, हरदोई), कृष्ण कुमार मिश्रा (तहसीलदार, देवरिया), सौरभ कुमार (तहसीलदार, जौनपुर), रंजन वर्मा (तत्कालीन नायब तहसीलदार, अयोध्या और संप्रति तहसीलदार, गाजीपुर) और अलख शुक्ला (तहसीलदार, प्रतापगढ़) शामिल हैं।

इससे पहले, एक सितंबर को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था।

बयान में कहा गया है कि कारण बताओ नोटिस पाने वालों में चंद्रशेखर वर्मा (तत्कालीन तहसीलदार, देवरिया), गोपाल जी (तत्कालीन नायब तहसीलदार, देवरिया), रविरंजन कश्यप (तहसीलदार, जौनपुर), राकेश कुमार (तत्कालीन तहसीलदार, जौनपुर), कविता ठाकुर (तत्कालीन तहसीलदार, बाराबंकी), देवानंद तिवारी (तत्कालीन तहसीलदार, सुल्तानपुर), स्नेहल वर्मा (तत्कालीन नायब तहसीलदार, अयोध्या), राहुल सिंह (तहसीलदार, अमेठी), अनिल कुमार (तहसीलदार, प्रतापगढ़), यजुवेंद्र सिंह, सुखबीर सिंह (दोनों नायब तहसीलदार, लखनऊ), रमाशंकर मिश्रा (नायब तहसीलदार, रायबरेली) और शार्द सिंह (तहसीलदार, लखनऊ) शामिल हैं।

राजस्व परिषद ने कहा कि इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा रही है।

परिषद ने स्पष्ट किया कि यह एक सतत प्रक्रिया है और राजस्व मुकदमों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी, ताकि किसानों और आम नागरिकों को त्वरित और पारदर्शी न्याय मिल सके।

भाषा

आनन्द पारुल

पारुल