फतेहपुर (उप्र), 31 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में खराब सुविधाओं के खिलाफ विरोध की अगुवाई करने वाले 12वीं के छात्र के घर पुलिस के पहुंचने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। छात्र ने उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिसे पुलिस ने खारिज किया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर छात्रों के हालिया प्रदर्शन की तर्ज पर हुए इस प्रदर्शन ने सबका ध्यान आकर्षित किया। नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
इस हफ्ते की शुरुआत में किशनपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में सैकड़ों छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन ने उनकी शिकायतों को माना और पीने का पानी, बिजली, पंखे, शौचालय और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम शुरू किया। हालांकि, प्रदर्शन का चेहरा बने 12वीं कक्षा के छात्र अंकुर सोनकर ने आरोप लगाया कि आंदोलन खत्म होने के तुरंत बाद, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उसके घर आए, उसके परिवार से पूछताछ की और उन्हें थाना आने को कहा।
सोनकर ने पत्रकारों से कहा, ‘‘घंटों विरोध प्रदर्शन के बाद अधिकारी आए, हमारी मांगें मानीं और स्कूल में काम शुरू हो गया। हमें लगा कि हम अपनी लड़ाई जीत गए हैं, लेकिन शाम तक, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी हमारे घर आने लगे। उन्होंने मेरे माता-पिता से पूछा कि मैं कहां हूं और यह भी कहा कि हमें पुलिस थाने आना होगा।’
उसने आरोप लगाया कि पुलिस उन अन्य छात्रों के घरों पर भी गई जिन्होंने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था। सोनकर ने सवाल किया, ‘अगर हम बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाते हैं, तो क्या पुलिस को ऐसा व्यवहार करना चाहिए?’
आंदोलनकारी छात्र के आरोपों का जवाब देते हुए, फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिमन्यु मांगलिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) और बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के कर्मचारी अंकुर सोनकर के घर केवल छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने और स्कूल की समस्याओं को समझने के लिए गए थे।
उन्होंने कहा, ‘इस दौरे के पीछे कोई गलत मकसद नहीं था। न तो छात्र और न ही उसके परिवार को किसी भी तरह से परेशान किया गया।’
मांगलिक ने कहा कि सोनकर नाबालिग है और पुलिसकर्मी बाल संरक्षण दिशानिर्देशों और अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए सादे कपड़ों में उसके घर गए थे। उन्होंने दोहराया कि किसी भी छात्र या परिवार के सदस्य को परेशान या डराया-धमकाया नहीं गया।
फतेहपुर की जिलाधिकारी (डीएम) निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि छात्रों की मांगें जायज थीं और प्रशासन ने स्कूल में सुधार के उपाय पहले ही शुरू कर दिए थे। पुलिस के छात्रों के घरों पर जाने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यह कदम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था कि कोई असामाजिक तत्व आंदोलन का फायदा न उठाए।
इस बीच, उसी स्कूल की 16 साल की एक छात्रा 28 जुलाई से लापता है। हालांकि पुलिस ने उसके लापता होने और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया है।
परिवार के अनुसार, लड़की 28 जुलाई को स्कूल के लिए घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। अगले दिन किशनपुर पुलिस थाना में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई गई। पीड़िता की मां, आशा देवी ने बताया कि लड़की के सहपाठियों और शिक्षकों ने पुष्टि की है कि वह विरोध प्रदर्शन वाले दिन स्कूल पहुंची थी।
मांगलिक ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में लड़की को एक बैग ले जाते हुए देखा गया। फुटेज से पता चला कि बाद में उसने अपनी स्कूल पोशाक बदल ली और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ जाते हुए देखी गई।
एसपी ने बताया कि तलाशी अभियान के तहत पुलिस टीम को महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर भेजा गया है, और जल्द ही लड़की का पता चलने की उम्मीद है।
किशनपुर थाना के प्रभारी मनीष कुमार सिंह ने कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि लड़की स्कूल पहुंची थी लेकिन विरोध प्रदर्शन देखकर परिसर से चली गई।
कॉजपा की अगुवाई में जंतर-मंतर पर छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शन की तर्ज पर यहां के एक सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज के सैकड़ों विद्यार्थियों ने कथित तौर पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर मंगलवार को पांच घंटे विरोध प्रदर्शन किया।
शिक्षा अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को 24 घंटे के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया देने के बाद यह विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ।
भाषा सं आनन्द आशीष
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