‘वीर चक्र’ विजेता की पत्नी विजय कुमार ने अपना 80वां जन्मदिन मनाया

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‘वीर चक्र’ विजेता की पत्नी विजय कुमार ने अपना 80वां जन्मदिन मनाया

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  • Publish Date - August 15, 2026 / 03:36 PM IST,
    Updated On - August 15, 2026 / 03:36 PM IST

(अरुणव सिन्हा)

लखनऊ, 15 अगस्त (भाषा) पुरानी कहावत है कि महिलाओं की उम्र और पुरुषों की पगार कभी नहीं पूछनी चाहिए। लेकिन, लखनऊ में बसे पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर धीरेंद्र नाथ सिंह की पत्नी विजय कुमार अपनी उम्र के बारे में पूछने पर खुश होकर कहती हैं, ‘‘जितनी आजाद भारत की उम्र, उतनी मेरी उम्र’’।

कुमार ने शनिवार को अपना 80वां जन्मदिन मनाया।

विजय कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘मेरा जन्म वाराणसी में उसी मध्य रात्रि हुआ था जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अंग्रेजी हुकूमत समाप्त होने का संकेत देते हुए भारतीय तिरंगा फहराया था।’’

कुमाऊं रेजिमेंट के मेजर धीरेंद्र नाथ सिंह को 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के लिए ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था। सिंह की पत्नी विजय याद करती हैं कि कैसे उनकी जन्म तिथि ने उनकी लोकप्रियता में भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “मैं जब प्राइमरी स्कूल में थी, मेरी सहेलियां अक्सर मेरी जन्म तिथि के बारे में बात किया करती थीं। चाहे वह स्कूल के कार्यक्रम हो, रैलियां हों और प्रभात फेरी हो, हर जगह वे इसकी चर्चा करती थीं। मेरे माता-पिता कहा करते थे कि मेरा जन्मदिन पूरे देश में मनाया जाता है। स्वतंत्रता दिवस पर पैदा होने के कारण मेरे पिता ने मेरा नाम विजय रखा।”

कुमार ने कहा, “शादी के बाद मेरे पति अक्सर कहा करते कि मेरी किस्मत, मेरे देश की किस्मत से जुड़ी हुई है क्योंकि मेरे जन्म की तारीख और समय आजाद भारत के समान है।”

विजय के दो बेटों को सेना में अधिकारी (1988 और 1989) के तौर पर नौकरी मिली और इसी तरह उनका एक पोता भी 2016 में सेना में अधिकारी बना, जबकि दूसरा पोता मध्य प्रदेश के मऊ में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। उनका तीसरा बेटा दंत चिकित्सक है। उनकी एक बेटी भी है।

विजय बड़े गर्व से कहती हैं, “मेरे पूरे परिवार ने राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन लगाया है।”

सबसे यादगार पल के बारे में पूछने पर वह कहती हैं, ‘‘मेरे पति को वीर चक्र से सम्मानित किया जाना मेरे लिए सबसे यादगार पल था। 1965 के युद्ध में महज 25 साल की उम्र में उन्होंने विस्फोट में एक पैर गंवाने के बावजूद दुश्मन की बंदूकों को शांत कर दिया।”

मेजर (सेवानिवृत्त) सिंह ने चार अप्रैल, 2025 को दिल्ली में सेना के अस्पताल में अंतिम सांस ली।

भाषा अरुणव राजेंद्र नेत्रपाल शफीक

शफीक