मथुरा में मकान हड़पने के लिए सास की हत्या की दोषी महिला को आजीवन कारावास की सजा

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मथुरा में मकान हड़पने के लिए सास की हत्या की दोषी महिला को आजीवन कारावास की सजा

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 04:48 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 04:48 PM IST

मथुरा (उप्र), 18 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मथुरा में जिला एवं सत्र न्यायालय ने मकान हड़पने के लिए सास की हत्या की आरोपी महिला को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। अभियोजन पक्ष ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) शिवराम सिंह तरकर ने बताया कि जिला न्यायाधीश विकास कुमार ने बृहस्पतिवार को सीता वर्मा नामक महिला को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

उन्होंने कहा कि अदालत ने महिला का साथ देने के आरोपी युवक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

डीजीसी ने बताया कि मामला वर्ष 2014 में जिले के गोविंद नगर थाना क्षेत्र की गली पातीराम का है, जिसमें महिला ने पति व सास का मकान हड़पने के लिए सास की हत्या कर दी थी।

तरकर ने बताया कि राजस्थान के धौलपुर के निवासी अशोक वर्मा ने सात दिसंबर 2014 को गोविंद नगर थाने में अपनी सास सावित्री देवी की हत्या के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

प्राथमिकी के अनुसार सावित्री देवी सेवानिवृत्त शिक्षिका थीं और कभी धौलपुर में बेटी के पास तो कभी मथुरा स्थित अपने मकान में रहती थीं।

प्राथमिकी में कहा गया है कि वर्मा के अनुसार सावित्री का चामुण्डा कॉलोनी स्थित मकान बेटे आदित्य वर्मा और उनके नाम पर था, जिस पर कब्जे को लेकर आदित्य का सावित्री से लंबे समय से विवाद था।

वर्मा के अनुसार वारदात के समय आदित्य की दूसरी पत्नी सीता उसी मकान में रह रही थी और छह दिसंबर 2014 को मथुरा आई नातिन आध्या अगले दिन जब सावित्री देवी से मिलने पहुंची तो उन्हें कुर्सी पर खून से लथपथ पाया।

पुलिस जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला कि सावित्री देवी की हत्या उनकी पुत्रवधू सीता वर्मा ने अपने मित्र विनय के साथ मिलकर की थी। पुलिस ने सीता और विनय को गिरफ्तार करने के बाद जांच की और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। लंबी सुनवाई के बाद जिला न्ययााधीश विकास कुमार ने सीता वर्मा को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया जबकि विनय को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

भाषा सं आनन्द जोहेब

जोहेब