Uttarakhand Char Dham Yatra: गैर-सनातनियों के लिए चार-धाम समेत 47 मंदिरों में प्रवेश प्रतिबंधित.. पवित्रता और सुरक्षा को लेकर समिति का अभूतपूर्व फैसला
Uttarakhand Char Dham Yatra New Rule: उत्तराखंड चारधाम यात्रा में 47 मंदिरों में गैर-सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित, सुरक्षा और पवित्रता के लिए समिति का फैसला।
Uttarakhand Char Dham Yatra New Rule || Image- Char Dham Yatra 2026 file
- चारधाम यात्रा में गैर-सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित
- कुल 47 मंदिरों पर यह नियम लागू
- बद्रीनाथ और केदारनाथ प्रमुख मंदिर शामिल
देहरादून: उत्तराखंड के छोटे चारधाम यात्रा के मद्देनजर, बद्री-केदार मंदिर समिति ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। समिति ने घोषणा की है कि अब से बदरीनाथ, केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर-सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। (Uttarakhand Char Dham Yatra New Rule) बताया गया है कि, यह निर्णय सनातन धर्म के अनुशासन और आस्थाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
फोटोग्राफी के लिए सीमित स्थान तय
समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस आदेश का उद्देश्य धार्मिक आस्थाओं को संरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि मंदिरों के गर्भगृह में मोबाइल फोन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, मंदिर परिसर में फोटोग्राफी के लिए सीमित स्थान तय किए जाएंगे, ताकि भक्तों को कोई परेशानी न हो और धार्मिक माहौल बनाए रखा जा सके।
गैर-हिन्दुओं के लिए आस्था के साथ शपथ पत्र आवश्यक
इसके साथ ही, हेमंत द्विवेदी ने एक और महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो, सनातन धर्म में अपनी आस्था व्यक्त करता है और एक शपथ पत्र देता है, तो उसे मंदिर में दर्शन करने की अनुमति दी जा सकती है। (Uttarakhand Char Dham Yatra New Rule) यह कदम उन लोगों के लिए है जो सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं और मंदिरों में आस्था रखते हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस निर्णय को लेकर भक्तों और श्रद्धालुओं के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं, लेकिन समिति का मानना है कि यह फैसला धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
Dehradun, Uttarakhand: On the Chardham yatra, Badrinath–Kedarnath Temple Committee, President, Hemant Dwivedi says, ”Once again I would like to tell you about Sanatan and non-Sanatan. This is not a new system. Adi Shankaracharya had made this system since ancient times..” pic.twitter.com/rQM3UklHjv
— IANS (@ians_india) March 17, 2026
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