Uttarakhand News: बेटी की निधन के बाद नसीब नहीं हुई सूखी लकड़ी, तो पिता ने ऐसे किया अंतिम संस्कार, जानकर आपके भी आंखों में आ जाएंगे आंसू

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Uttarakhand News: बेटी की निधन के बाद नसीब नहीं हुई सूखी लकड़ी, तो पिता ने ऐसे किया अंतिम संस्कार, जानकर आपके भी आंखों में आ जाएंगे आंसू

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 08:57 AM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 08:57 AM IST

Uttarakhand News | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • 19 वर्षीय युवती के अंतिम संस्कार में परिजनों को चार घंटे तक संघर्ष करना पड़ा
  • गीली लकड़ियों के कारण चिता नहीं जली,
  • मजबूरी में डीजल और टायरों का इस्तेमाल करना पड़ा

श्रीनगर: Uttarakhand News एक पिता के लिए अपनी जवान बेटी की अर्थी को कंधा देना जीवन का सबसे बड़ा दुख माना जाता है। ऐसा ही झकझोर करने वाला मामला उत्तराखंड से सामने आया है, जहां 19 साल की जवान बेटी मौत के बाद पिता अंतिम संस्कार किया, लेकिन हैरानी की बात ये है कि लाडली की चिता जलाने के लिए पूरे चार घंटे तक सिसकना पड़ा और अं​त में लकड़ी की जगह डीजल और पुराने टायरों की मदद अंतिम संस्कार किया गया।

Uttarakhand News मिली जानकारी के अनुसार, मामला श्रीनगर के वार्ड संख्या 12 का है। दरअसल, यहां रहने वाली एक 19 साल की युवती का निधन हो गया। जिसके बाद अंतिम संस्कार के लिए परिवार अलकेश्वर घाट पहुंचे, यहां परिजनों ने चिता को अगनी देने के लिए लकड़ियां खरीदीं, लेकिन लड़की इतनी गिली थी कि बार-बार कोशिश करने के बाद भी आग नहीं पकड़ पाईं।

4 घंटे का इंतज़ार के बाद डीजल से जलाया गया चिता

काफी मशक्कत के बाद आग नहीं पकड़ा तो परिजनों को समझ नहीं आया कि क्या करें। सभी ये देखकर भावुक हो गए थे कि आखिर आग क्यों नहीं पकड़ रही। 4 घंटे के इंतजार के बाद ​हार मानकर परिजनों ने 5 लीटर डीजल मंगाया, लेकिन इसके बाद भी लकड़ियां गिली होने की वजह से आग नहीं पकड़ पाई। इसके बाद 10 लीटर डीजल और मंगाया गया। साथ ही दो कट्टे पुराने टायर, ट्यूब, फटे कपड़े और गद्दों का इंतजाम किया गया। जिसके बाद बेटी को अग्नि मिल सकी।

परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप

घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधियों में रोष है। परिजनों को आरोप है कि टाल संचालक ने पूरी कीमत लेने के बावजूद गीली लकड़ियां दीं, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा के साथ अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। वहीं वार्ड पार्षद शुभम प्रभाकर ने नगर निगम मेयर को पत्र लिखकर घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि “मुनाफाखोरी इतनी बढ़ गई है कि अब शवों की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा।”

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यह घटना कहाँ हुई?

उत्तराखंड के श्रीनगर (वार्ड संख्या 12) में।

चिता क्यों नहीं जल पाई?

टाल संचालक द्वारा दी गई लकड़ियां गीली थीं, जिससे आग नहीं पकड़ पाई।

परिजनों ने चिता जलाने के लिए क्या किया?

मजबूरी में उन्होंने डीजल, पुराने टायर, ट्यूब, कपड़े और गद्दों का इस्तेमाल किया।