संयुक्त राष्ट्र, 18 सितंबर (एपी) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि दुनिया बेकाबू होती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), तेजी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन और गहराती असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है तथा इनसे निपटने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।
लगभग एक दशक तक पद पर रहे गुतारेस इस साल के अंत में पद छोड़ेंगे।
दुनिया की स्थिति को लेकर अक्सर निराशाजनक तस्वीर पेश करने वाले भाषणों के लिए जाने जाने वाले गुतारेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि आगामी वर्षों में उन्हें उम्मीद और संभावनाएं नजर आती हैं लेकिन ऐसा तभी संभव है जब दुनिया की सरकारें संघर्षों को कम करने, असमानता दूर करने और तेजी से उभर रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की चुनौती से निपटने के लिए मिलकर काम करें।
गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक के लिए विश्व नेताओं के जुटने से चार दिन पहले ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मेरा मानना है कि दुनिया को बेहतर बनाने के लिए कई बुनियादी काम किए जाने की जरूरत है और मैं उन कार्यों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करने को प्रतिबद्ध हूं।’’
गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि उन्हें इस तथ्य का बेहद गंभीरता से आकलन करना होगा कि दुनिया कम से कम तीन ऐसी समस्याओं का सामना कर रही है जो उसके अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती हैं-बेकाबू होती कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तेजी से बढ़ता जलवायु परिवर्तन और बढ़ती असमानता, जो अस्थिरता एवं संघर्ष का गंभीर कारण बनती जा रही है।
गुतारेस ने यह भी चेतावनी दी कि ‘‘व्यापक भू-राजनीतिक विभाजन’’ और सुरक्षा परिषद में गतिरोध ने ऐसा माहौल पैदा कर दिया है जिसमें शक्तिशाली देश अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने के बावजूद दंड से बच रहे हैं। रूस का यूक्रेन पर आक्रमण और अमेरिका के ईरान पर हमले इसका उदाहरण हैं। रूस और अमेरिका दोनों सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार रखने वाले सदस्य हैं।
महासचिव ने कहा, ‘‘कई देश कहते हैं, ‘अगर महाशक्तियां कानून का उल्लंघन कर सकती हैं तो हम क्यों नहीं?’ इसलिए हम दुनिया भर में ऐसी स्थितियां बढ़ते देख रहे हैं जिनमें देशों को कोई परवाह नहीं है। वे जो चाहते हैं, वही करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें दंड से पूरी तरह छूट मिल जाएगी।’’
गुतारेस ने कहा कि कानून के उल्लंघन और दोषियों के दंड से बचने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और भारी तबाही हुई है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष मिलकर विश्व अर्थव्यवस्था पर ‘‘गंभीर प्रभाव’’ डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खाद्य एवं ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, ब्याज दरों में वृद्धि हो रही है और विकासशील देशों को अपने लोगों की जरूरतें पूरी करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
गुतारेस ने उम्मीद जताई कि ये समस्याएं लोगों को यह समझने के लिए मजबूर करेंगी कि इन बाधाओं को कोई देश अकेले दूर नहीं कर सकता और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में विजयी शक्तियों द्वारा स्थापित संस्थाओं-संयुक्त राष्ट्र, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद, तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसी प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थाओं- में सुधार के मामले में यह बात विशेष रूप से लागू होती है।
गुतारेस ने कहा कि इन संस्थाओं में आमूलचूल बदलाव कर उन्हें 21वीं सदी की उन वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए जिनमें नयी अर्थव्यवस्थाएं एवं शक्तियां उभर रही हैं और वैश्विक संस्थाओं में उनके महत्व को उचित स्थान मिलना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के रूप में महासचिव के पास न तो अपनी सेना होती है, न खुफिया सेवा और न ही बहुत अधिक धन। गुतारेस ने हालांकि कहा कि उनके पास दो शक्तियां हैं-वैश्विक मुद्दों पर खुलकर बोलना और दुनिया के देशों को एक मंच पर लाना।
गुतारेस ने कहा कि भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने में संयुक्त राष्ट्र की प्रभावी भूमिका निभाने की गुंजाइश बेहद सीमित है लेकिन उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा तथा ‘‘मानवाधिकारों के भयावह उल्लंघन’’ की निंदा करने में दृढ़ता दिखाई है।
उन्होंने सात अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजराइल में हमास के हमले की निंदा की और साथ ही ‘‘गाजा में इजराइल द्वारा पैदा की गई भयावह स्थिति’’ की भी आलोचना की।
गुतारेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा उपायों की वकालत की है।
उन्होंने कहा कि एआई से जुड़ी चुनौती से निपटने के लिए उन्नत स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित कर रहे देशों को सूचनाओं का आदान-प्रदान करना चाहिए, पारदर्शिता के लिए व्यवस्था बनानी चाहिए, कुछ सुरक्षा उपाय तय करने चाहिए और ‘‘आदर्श रूप से ऐसी बहुपक्षीय व्यवस्था बनाने में मदद करनी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जोखिमों से बचा जा सके।’’
गुतारेस ने कहा कि कम संसाधनों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र अपनी गतिविधियां जारी रखने में सफल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने साबित किया है कि दुनिया के किसी भी देश के किसी भी संगठन की तुलना में सार्वजनिक खर्च पर हमारा नियंत्रण सबसे बेहतर है।’’
एपी सिम्मी रंजन
रंजन