ब्रिटेन : सेप्सिस के कारण हाथ पैर खो चुकी भारतीय मूल की महिला अब इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाएगी

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ब्रिटेन : सेप्सिस के कारण हाथ पैर खो चुकी भारतीय मूल की महिला अब इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाएगी

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  • Publish Date - February 23, 2026 / 12:14 PM IST,
    Updated On - February 23, 2026 / 12:14 PM IST

( अदिति खन्ना )

लंदन, 23 फरवरी (भाषा) इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स क्षेत्र में भारतीय मूल की 56 वर्षीय महिला के दोनों पैर और दोनों हाथ पिछले साल जुलाई में सेप्सिस की वजह से काटने पड़े थे और अब यह महिला सेप्सिस के खतरों को लेकर जागरूकता फैला रही है।

मंजीत सांघा को पिछले वर्ष जुलाई में सेप्सिस हो गया था। संक्रमण के कारण उनके दोनों पैरों को घुटनों के नीचे से तथा दोनों हाथों को काटना पड़ा। चिकित्सकों का मानना है कि सेप्सिस का संक्रमण किसी मामूली कारण, जैसे पालतू कुत्ते द्वारा किसी छोटे घाव या खरोंच के जख्म को चाटने से भी हो सकता है।

बर्मिंघम स्थित अस्पताल से बुधवार को छुट्टी मिलने से पहले मंजीत और उनके पति कमलजीत सांघा की मदद के लिए शुरू किए गए ‘गो फंड मी’ ऑनलाइन अभियान के माध्यम से 30,000 पाउंड से अधिक राशि जुटाई जा चुकी है।

मंजीत ने बीबीसी से कहा, “कम समय में अपने हाथ-पैर खो देना बहुत बड़ी बात है। यह बेहद गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अब वह दूसरों को चेतावनी देना चाहती हैं क्योंकि “यह किसी के साथ भी हो सकता है।”

पूर्व फार्मेसी कर्मचारी मंजीत पिछले वर्ष जुलाई में एक शाम काम से घर लौटीं तो अस्वस्थ महसूस कर रही थीं और अगली सुबह तक बेहोश हो गईं। उनके हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे थे, होंठ नीले पड़ गए थे और उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही थी।

गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में उनके हृदय की धड़कन छह बार रुकी। हालत बिगड़ने पर उनके दोनों पैर और दोनों हाथ काटने पड़े। चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें सेप्टिक शॉक तथा डिसेमिनेटेड इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन (डीआईसी) की समस्या है जो रक्त के असामान्य थक्के बनने की दुर्लभ और जानलेवा स्थिति है। उनकी जीवित रहने की संभावना बहुत कम बताई गई थी।

उनके 60 वर्षीय पति ने कहा, “वह सबसे मजबूत इंसान हैं जिन्हें मैं जानता हूं। हर बार जब मुझे लगा कि मैं उन्हें खो चुका हूं, वह लड़कर वापस आईं। अब हमारी बारी है कि हम उनके लिए लड़ें।”

कमलजीत ने पत्नी की देखभाल के लिए सात महीने से काम से अवकाश ले रखा है। जुटाई गई राशि उन्नत कृत्रिम अंगों, घर में आवश्यक अनुकूल बदलाव, फिजियोथेरेपी, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और पुनर्वास पर खर्च की जाएगी। मंजीत की देखभाल में सीधे उपयोग न होने वाली राशि ‘पॉजिटिव बोन्स’ नामक संस्था को दान की जाएगी, जो अंग-विहीन व्यक्तियों को सशक्त बनाने का कार्य करती है।

सेप्सिस एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जो तब उत्पन्न होती है जब संक्रमण से लड़ने वाली शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं शरीर के ऊतकों और अंगों पर हमला करने लगती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के अनुसार इसके लक्षणों की पहचान कठिन हो सकती है, जिनमें अस्पष्ट बोलना, अत्यधिक ठिठुरन या मांसपेशियों में दर्द, गंभीर सांस फूलना और त्वचा का धब्बेदार होना या रंग बदलना शामिल हैं।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव