वेलिंगटन (न्यूजीलैंड), 22 मार्च (द कन्वरसेशन) ‘बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस’ (जीवाणु जनित मस्तिष्क ज्वर) एक बार फिर दुनियाभर में सुर्खियों में है। इस बीमारी के हाल में सामने आए मामले न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय और इंग्लैंड के केंट विश्वविद्यालय से जुड़े हैं।
‘बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस’ को एक गंभीर और जानलेवा बीमारी माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि इससे संक्रमित लगभग हर छह में से एक व्यक्ति की मौत हो जाती है, भले ही उसे तुरंत चिकित्सकीय देखभाल और एंटीबायोटिक उपचार मिला हो।
यह आंकड़ा भयावह है जिस पर अकसर बात होती है लेकिन इस बारे में अधिक बात नहीं की जाती कि इस अत्यधिक संक्रामक रोग से बच जाने वाले लोगों के साथ भविष्य में क्या होता है।
‘बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस’ संबंधी अधिकतर शोध का रुख लगभग एक जैसा रहा है और उनमें मुख्य रूप से उस गंभीर चरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है जब लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं और उनका उपचार चल रहा होता है लेकिन इससे इस धारणा को भी बल मिलता है कि ‘बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस’ एक अल्पकालिक बीमारी है जबकि ऐसा नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय साक्ष्य बताते हैं कि अधिकतर मरीजों को इलाज के काफी बाद तक भी शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्तर पर इसके असर झेलने पड़ते है।
‘बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस’ से पीड़ित रह चुके लोगों पर हमारा नया शोध आओटेरोआ न्यूजीलैंड में इस तरह का पहला अध्ययन है।
‘मेनिन्जाइटिस फाउंडेशन आओटेरोआ न्यूजीलैंड’ के सहयोग से हमने 16 वयस्क प्रतिभागियों के साथ शोध किया और इनमें से 10 लोगों के साथ गहन साक्षात्कार किए।
इससे हमें बारीकी से और व्यक्तिगत स्तर पर यह समझने में मदद मिली कि मेनिन्जाइटिस के बाद का जीवन वास्तव में कैसा होता है। हमारे निष्कर्ष संक्रमण के बड़े और लंबे समय तक रहने वाले असर को दिखाते हैं।
प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस एक दीर्घकालिक बीमारी है जो व्यापक रूप से प्रभावित करती है।
उन्होंने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी कई दीर्घकालिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी। इनमें थकान, एकाग्रता में कठिनाई, याददाश्त और भावनात्मक नियंत्रण में दिक्कत, लगातार सिरदर्द तथा चलने-फिरने, देखने और सुनने से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
कुछ लोगों के लिए ये दुष्प्रभाव स्थायी थे और कई लोगों में ये वर्षों तक बने रहे। प्रतिभागियों ने दुष्प्रभावों के बारे में सटीक और उपयोगी चिकित्सकीय सलाह न मिलने का भी जिक्र किया।
कई लोगों ने बताया कि जब उन्हें उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई तब वे सदमे में थे। एक प्रतिभागी ने बताया कि छुट्टी मिलने के बाद उन्हें कोई सहयोग नहीं दिया गया और न ही उन्हें संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने प्रतिभागियों के साथ ऐसा व्यवहार किया कि मानो वे स्वस्थ हो चुके हों और जल्द ही अपनी सामान्य गतिविधियां फिर शुरू कर सकते हैं। चिकित्सकों ने कई प्रतिभागियों से कहा कि वे कुछ ही हफ्तों में कार्यस्थल या स्कूल लौट सकते हैं।
यह सलाह चिंताजनक रूप से गलत साबित हुई। जिन लोगों से हमने बात की, उनमें से अधिकतर ने ऐसे दुष्प्रभाव झेले जिन्होंने उनके काम करने, पढ़ाई करने और सामान्य सामाजिक जीवन जीने की क्षमता को महीनों या वर्षों तक प्रभावित किया।
हमारे निष्कर्ष दिखाते हैं कि बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस केवल एक जानलेवा संक्रमण नहीं है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके गंभीर और दीर्घकालिक दुष्प्रभाव होते हैं लेकिन उन्हें पर्याप्त रूप से समझा नहीं गया है।
हमें टीकाकरण की दर बढ़ाने और लक्षणों की बेहतर तरीके से पहचान करने के प्रयासों की जरूरत है। इनके साथ ही इस बीमारी के दुष्प्रभाव झेल रहे लोगों के लिए और बेहतर काम करने की आवश्यकता है।
हमारी सिफारिशें रेखांकित करती हैं कि मरीजों और उनके परिवारों को यथार्थपरक जानकारी और समय पर सहयोग की जरूरत है ताकि वे बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस के बाद के जीवन के अनुरूप खुद को ढाल सकें।
द कन्वरसेशन
सिम्मी अमित
अमित