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ढाका, 13 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) देश के ऐतिहासिक संसदीय चुनावों के लिए शुक्रवार को जारी मतगणना के बीच शानदार जीत की ओर अग्रसर है और दो दशक के अंतराल के बाद सत्ता में वापसी के लिए तैयार है।
ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब देश उथल-पुथल भरी राजनीतिक शून्यता, अस्थिरता और सुरक्षा की नाजुक स्थिति से गुजर रहा है। देश में पिछले साल अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अल्पसंख्यकों पर व्यापक पैमाने पर हमले हुए हैं। छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 15 साल के शासन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था।
यह लगभग स्पष्ट होता जा रहा है कि बीएनपी के शीर्ष नेता तारिक रहमान नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की जगह लेंगे और देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी ने 300-सीट वाली संसद में 151 से अधिक सीट जीत ली हैं तथा उसके और सीट जीतने की संभावना है। पाकिस्तान की करीबी माने जाने वाली कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी लगभग 75 सीट पर बढ़त बनाए हुए है या जीतती नजर आ रही है। हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
बीएनपी के मीडिया प्रकोष्ठ ने जीत का दावा करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी-बीएनपी अधिकतर सीट पर जीत हासिल करने के बाद सरकार बनाने के लिए तैयार है।’’
निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक परिणामों की अभी तक घोषणा नहीं की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कुछ नेताओं ने चुनाव में बीएनपी के प्रदर्शन पर रहमान को बधाई दी। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि रहमान की जीत ने उनके नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता के भरोसे को दर्शाया है। मोदी ने कहा, ‘‘भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा। मैं आपके साथ मिलकर हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हूं।’’
बीएनपी ने देश के आम चुनाव के नतीजे को मान्यता देने के लिए भारत और प्रधानमंत्री मोदी को शुक्रवार को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि नयी सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे।
बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य और 2026 के चुनाव के मुख्य समन्वयक नजरुल इस्लाम खान ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘हमारे नेता तारिक रहमान को बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हम धन्यवाद देते हैं। किसी लोकतांत्रिक देश द्वारा जनता के फैसले को मान्यता दिया जाना अच्छी बात है और नरेन्द्र मोदी ने ऐसा किया है। हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।’’
हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में गंभीर तनाव देखने को मिला है।
पाकिस्तान के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने भी बीएनपी और उसके नेता तारिक रहमान को संसदीय चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने पर बधाई दी।
‘रेडियो पाकिस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बयान जारी कर 299 सीट पर 12 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं की भागीदारी के साथ सफल चुनाव के लिए बांग्लादेश की जनता को बधाई दी।
उन्होंने बांग्लादेश की संप्रभुता और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के प्रति पाकिस्तान के समर्थन की पुष्टि करते हुए कहा कि पाकिस्तान ‘‘व्यापार, रक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय मंचों में सहयोग को मजबूत करने के मकसद से नयी सरकार के साथ काम करने के लिए तत्पर है।’’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी बीएनपी को ‘‘शानदार जीत’’ दिलाने पर रहमान को बधाई दी।
निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता के अनुसार, कई सीट के परिणाम अभी नहीं आए हैं और उन्हें कुछ ही घंटों में घोषित किए जाने की संभावना है।
ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने बांग्लादेश की जनता को ‘‘सफल आम चुनाव’’ के लिए अग्रिम बधाई दी और बीएनपी एवं रहमान की ‘‘ऐतिहासिक जीत’’ के लिए विशेष रूप से सराहना की।
देश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग के चुनाव मैदान में नहीं होने के कारण इस चुनाव को बीएनपी और उसके पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा गया।
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार 18 महीने से सत्ता में है।
बांग्लादेश में जटिल 84-सूत्री सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह के साथ-साथ 13वां आम चुनाव कराया गया। सुधार पैकेज को ‘जुलाई राष्ट्रीय घोषणापत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।
बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी। उस समय जमात उसकी महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी थी और उसके दो नेता मंत्री के रूप में कार्यरत थे।
जमात ने इन चुनावों के दौरान ‘‘असामान्य देरी’’ एवं ‘‘परिणामों में हेरफेर’’ के आरोप लगाए हैं तथा चेतावनी दी है कि अगर जनता का जनादेश ‘‘छीन लिया गया’’ तो वह एक बड़ा आंदोलन करेगी।
जमात के सहायक महासचिव अहसानुल महबूब जुबैर ने निर्वाचन आयोग भवन में शुक्रवार तड़के पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि मतगणना अधिकारी एक ‘‘विशेष पार्टी’’ के पक्ष में परिणामों में जानबूझकर देरी कर रहे हैं।
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में पिछले साल गठित 11 दलों के दक्षिणपंथी गठबंधन में जमात की प्रमुख सहयोगी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने भी विशेष रूप से ढाका की कई सीट पर ‘‘परिणामों में हेरफेर और सुनियोजित धोखाधड़ी’’ के आरोप लगाए हैं।
बीएनपी ने पहले घोषणा की थी कि यदि वह चुनाव जीतती है तो उसके अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।
अगर पार्टी चुनाव जीतती है तो रहमान पिछले 35 वर्ष में बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे।
बीएनपी की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति के प्रवक्ता महदी अमीन ने शुक्रवार तड़के संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम दो-तिहाई से अधिक सीट जीतकर सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त हैं।’’
करीब 17 वर्ष के स्वनिर्वासन के बाद पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटे रहमान ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से विजय रैलियां निकालने के बजाय दोपहर में ‘जुमे’ की नमाज के बाद पूरे देश में विशेष दुआएं करने को कहा।
निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की मौजूदगी को लेकर हेरफेर के आरोपों को खारिज किया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ए एम एम नासिरुद्दीन ने बृहस्पतिवार शाम एक संवाददाता से कहा, ‘‘पिछले चुनावों में भी मतदान प्रतिशत को लेकर बहस होती रही है। कृपया अब इसे लेकर सवाल न उठाएं।’’
उन्होंने कहा कि रुझान में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है, क्योंकि कई हजार मतदान केंद्रों से नतीजे अलग-अलग समय पर आते हैं।
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने पहले कहा था कि बृहस्पतिवार को 42,651 मतदान केंद्रों में से 36,031 पर अपराह्न दो बजे तक 47.91 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
देश भर में 300 में से 299 संसदीय सीट पर मतदान बृहस्पतिवार सुबह साढ़े सात बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुआ और शाम साढ़े चार बजे तक जारी रहा। एक निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु होने के कारण मतदान रद्द कर दिया गया था।
मतदान 4:30 बजे (स्थानीय समय) समाप्त होने के तुरंत बाद मतों की गिनती शुरू हो गई।
निर्वाचन आयोग ने चुनाव के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे और लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था जो देश के चुनावी इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी तैनाती है।
भाषा सिम्मी सुरेश
सुरेश