Brahmos Missile Deal: क्या अब आपस में भिड़ने वाले हैं ये दो देश, अचानक भारत से Brahmos Missile खरीदेगा ये देश, किसे बनाएगा निशाना?

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Brahmos Missile Deal: भारत की रक्षा तकनीक को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया ने भारत से अत्याधुनिक BrahMos Supersonic Cruise Missile प्रणाली खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 07:28 AM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 07:40 AM IST

BRAHMOS INDONESIA/ image source: ibc24

HIGHLIGHTS
  • इंडोनेशिया खरीदेगा भारत का ब्रह्मोस सिस्टम
  • भारत-इंडोनेशिया रक्षा समझौते की पुष्टि
  • समुद्री सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी

Brahmos Missile Deal: नई दिल्ली: भारत की रक्षा तकनीक को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया ने भारत से अत्याधुनिक BrahMos Supersonic Cruise Missile प्रणाली खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सोमवार को इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय ने इस डील की आधिकारिक पुष्टि की। मंत्रालय के प्रवक्ता Rico Ricardo Siregar (रिको रिकार्डो सिरैत) ने बताया कि यह समझौता इंडोनेशिया की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से। हालांकि, उन्होंने इस सौदे की कुल कीमत सार्वजनिक नहीं की है।

India Indonesia Defence Deal: भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदेगा इंडोनेशिया

जानकारी के अनुसार भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल खरीद को लेकर बातचीत वर्ष 2023 से चल रही थी। उस समय इस संभावित रक्षा सौदे की कीमत लगभग 200 से 350 मिलियन डॉलर के बीच आंकी जा रही थी। इंडोनेशिया ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि वह इस मिसाइल प्रणाली की कितनी यूनिट खरीदेगा। यह सौदा भारत-रूस के संयुक्त उद्यम BrahMos Aerospace के माध्यम से किया जा रहा है, जिसने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक को विकसित किया है।

BrahMos Supersonic Cruise Missile: इंडोनेशिया ने क्यों लिया ये फैसला

इंडोनेशिया द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। दरअसल South China Sea में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर इंडोनेशिया लंबे समय से सतर्क है। खासकर Natuna Islands के आसपास के समुद्री क्षेत्र को लेकर इंडोनेशिया और China के बीच तनाव बना रहता है। चीन अपनी तथाकथित “नाइन-डैश लाइन” के आधार पर इस इलाके पर दावा करता है, जबकि इंडोनेशिया इसे अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का हिस्सा मानता है। इस क्षेत्र में तेल, गैस और मछली पकड़ने के अधिकारों को लेकर दोनों देशों के बीच समय-समय पर विवाद भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को इंडोनेशिया की समुद्री रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत और Russia ने संयुक्त रूप से किया है। इसकी खासियत यह है कि यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज, यानी करीब मैक 2.8 की रफ्तार से उड़ सकती है। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। मौजूदा ब्रह्मोस संस्करणों की मारक क्षमता लगभग 300 से 400 किलोमीटर तक है, जबकि भविष्य में इसकी रेंज को 800 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। हालांकि इंडोनेशिया को बेची जाने वाली मिसाइल की रेंज लगभग 290 किलोमीटर के आसपास बताई जा रही है।

इससे पहले Philippines ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना था। भारत और फिलीपींस के बीच करीब 3130 करोड़ रुपये का रक्षा सौदा हुआ था और पिछले वर्ष इस मिसाइल प्रणाली की डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है। अब इंडोनेशिया के साथ हुआ नया समझौता भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को भी नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

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ब्रह्मोस मिसाइल कौन खरीद रहा है?

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ब्रह्मोस किसने विकसित की है?

भारत और रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट

ब्रह्मोस की गति कितनी है?

ध्वनि से लगभग तीन गुना तेज