जलवायु परिवर्तन की डरावनी तस्वीरें क्या लोगों को कार्रवाई के लिए प्रेरित कर सकती हैं?

जलवायु परिवर्तन की डरावनी तस्वीरें क्या लोगों को कार्रवाई के लिए प्रेरित कर सकती हैं?

जलवायु परिवर्तन की डरावनी तस्वीरें क्या लोगों को कार्रवाई के लिए प्रेरित कर सकती हैं?
Modified Date: September 7, 2026 / 12:07 pm IST
Published Date: September 7, 2026 12:07 pm IST

( जोशुआ गारलैंड, लुंड यूनिवर्सिटी )

लुंड (स्वीडन), सात सितंबर (द कन्वरसेशन) गर्मियों के दौरान यूरोप ने जलवायु परिवर्तन की भयावह तस्वीरों का एक नया रूप देखा। जंगलों और घास के मैदानों में तेजी से फैलती जंगल की आग, सूखे के कारण सूखती नदियां और जलाशय तथा भीषण गर्मी से प्रभावित जनजीवन ने संकट की गंभीरता को सामने रखा।

अब गर्मी की खबरों के साथ समुद्र तटों पर छुट्टियां मनाते लोगों की सामान्य तस्वीरों की जगह उनके विनाशकारी प्रभावों को दिखाने वाली तस्वीरें ज्यादा दिखाई देने लगी हैं।

इसके अलावा सूखा, जल संरक्षण और खाद्य सुरक्षा जैसी समस्याएं अब केवल दूर-दराज के देशों तक सीमित नहीं रह गई हैं। इनके असर यूरोप और ब्रिटेन में लोगों के अपने घरों के आसपास भी साफ दिखाई देने लगे हैं। इन हालातों में जान-माल का नुकसान भी हुआ है।

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी तस्वीरें लोगों की सोच और उनके व्यवहार को प्रभावित करती हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ब्रिटेन और यूरोप में जलवायु संकट को तस्वीरों के माध्यम से किस तरह दिखाया जा रहा है और इनका दर्शकों पर क्या असर पड़ रहा है।

—– तस्वीरें होती हैं प्रभावशाली माध्यम —–

तस्वीरें संचार का एक प्रभावशाली माध्यम होती हैं, क्योंकि इन्हें लिखे हुए शब्दों की तुलना में जल्दी समझा जा सकता है और कई बार ये भावनाओं को अधिक गहराई से प्रभावित करती हैं। यही भावनाएं लोगों को कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

हालांकि, एक ही तस्वीर को अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से समझ सकते हैं। शोध से पता चलता है कि तस्वीरें तब ज्यादा प्रभाव डालती हैं, जब उनमें इंसानों से जुड़ी कहानियां दिखाई जाती हैं या वे ऐसी जगहों को दिखाती हैं जिनसे लोग परिचित होते हैं।

जलवायु परिवर्तन के मामले में सूखी जमीन, घटते नदी जलस्तर, जंगल की आग और अन्य दिखाई देने वाले प्रभाव बदलती जलवायु को लोगों के लिए ज्यादा वास्तविक और भावनात्मक बना सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि लोग इन भावनाओं के बाद क्या करते हैं और क्या ये उन्हें चिंता के साथ कार्रवाई के लिए प्रेरित करती हैं।

—– डर से बढ़ सकता है दूरी बनाने का खतरा —–

हालांकि, ऐसी तस्वीरों से एक खतरा भी जुड़ा है। भय, खतरे और असुरक्षा को दिखाने वाली तस्वीरें लोगों को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से दूर भी कर सकती हैं।

जब लोगों को लगता है कि समस्या बहुत बड़ी है और उनके नियंत्रण से बाहर है, तो वे खुद को असहाय महसूस कर सकते हैं। अगर जलवायु परिवर्तन इतना जटिल और विशाल दिखाई दे कि व्यक्तिगत प्रयासों का कोई असर न लगे, तो लोग यह सोचकर इससे दूरी बना सकते हैं कि उनके छोटे-छोटे बदलावों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

इस गर्मी में यूरोप में जंगलों की आग और लोगों के सुरक्षित स्थानों पर जाने की तस्वीरें इसी तरह का असर डाल सकती हैं। ये तस्वीरें जलवायु संकट की गंभीरता तो दिखाती हैं, लेकिन साथ ही लोगों में यह भावना भी पैदा कर सकती हैं कि वे इसके लिए कुछ नहीं कर सकते।

—– कार्रवाई के लिए अवसर भी बन सकती हैं तस्वीरें —-

हालांकि, ऐसा हमेशा नहीं होता। हालिया शोध से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दिखाने वाली ऐसी तस्वीरें लोगों में जागरूकता बढ़ाने, सोच बदलने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करने की क्षमता रखती हैं।

शोध में ‘ग्रीनपीस’ और ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन’ समेत 20 पर्यावरण अभियान समूहों द्वारा साझा की गई 724 तस्वीरों का अध्ययन किया गया। इन तस्वीरों को संरक्षण, विरोध प्रदर्शन, असुरक्षा और खतरे जैसे विषयों के आधार पर बांटा गया। इसके बाद छह प्रमुख तस्वीरों को चुनकर अभियान समूहों के सदस्यों से पूछा गया कि इन तस्वीरों को देखकर उन्हें कैसा महसूस हुआ और क्या वे जलवायु परिवर्तन के बारे में प्रभावी संदेश देती हैं।

अध्ययन में पाया गया कि जंगल की आग या ध्रुवीय भालू जैसी तस्वीरें, जो खतरे और असुरक्षा को दिखाती हैं, लोगों में सबसे अधिक नकारात्मक भावनाएं पैदा करती हैं, लेकिन इन्हें जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकारी देने के लिए सबसे उपयोगी भी माना गया।

इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर और चिंता पैदा करने वाले प्रभावों को दिखाने वाली तस्वीरें केवल संकट की याद दिलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोगों को जरूरी कदम उठाने के लिए प्रेरित भी कर सकती हैं।

अपने आसपास के स्थानों पर जलवायु परिवर्तन के असर और लोगों के नुकसान तथा संघर्ष की कहानियों को दिखाने वाली तस्वीरें इस संदेश को और मजबूत कर सकती हैं। इससे लोग जलवायु संकट को ज्यादा करीब से महसूस कर पाते हैं।

यूरोप में महसूस किए जा रहे जलवायु परिवर्तन और उनकी तस्वीरों के माध्यम से सामने आने वाली वास्तविकता लोगों को इस संकट से जुड़ने और भविष्य के लिए तैयारी करने के लिए प्रेरित करने का अवसर दे सकती है।

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी तस्वीरें लोगों की सोच और उनके व्यवहार को किस तरह प्रभावित करती हैं, इसे समझना आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि आने वाली गर्मियों में जलवायु संकट की ऐसी तस्वीरें हमारे आसपास और अधिक दिखाई देने की संभावना है।

द कन्वरसेशन मनीषा वैभव

वैभव


लेखक के बारे में