चीन ने तिब्बत जलविद्युत परियोजनाओं को नेपाल बाढ़ से जोड़ने के दावे खारिज किए

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चीन ने तिब्बत जलविद्युत परियोजनाओं को नेपाल बाढ़ से जोड़ने के दावे खारिज किए

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  • Publish Date - August 31, 2026 / 07:36 PM IST,
    Updated On - August 31, 2026 / 07:36 PM IST

(के.जे.एम. वर्मा)

बीजिंग, 31 अगस्त (भाषा) चीन ने तिब्बत में उसकी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को नेपाल में आई बाढ़ से जोड़ने के दावे सोमवार को खारिज कर दिए और इन्हें “दुर्भावनापूर्ण अटकलें” बताया।

माना जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से यह बाढ़ अचानक आयी।

पिछले सप्ताह आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के इलाकों को प्रभावित किया, जिसके कारण सैकड़ों लोगों की मौत हुई, हजारों लोग लापता हुए और घरों, सड़कों, पुलों व जलविद्युत ढांचे को नुकसान पहुंचा।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में संवाददाता सम्मेलन में चीनी परियोजनाओं को जिम्मेदार ठहराए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा, “चीन और नेपाल के विशेषज्ञों तथा आधिकारिक संस्थानों ने इस आपदा के कारणों का कुछ आकलन किया है। उनके विश्लेषण के अनुसार, भूस्खलन नेपाल में ऊंचाई वाले क्षेत्र में एक ग्लेशियर के ढहने के कारण हुआ।”

गुओ ने कहा, “भयानक आपदाओं के सामने हम ऐसी दुर्भावनापूर्ण अटकलों को खारिज करते हैं, जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।”

उन्होंने इस दावे को भी खारिज किया कि चीन आपदा में मारे गए और लापता लोगों की संख्या कम करके बता रहा है।

उन्होंने कहा, “आपदा प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर खोज, बचाव व राहत अभियान अभी भी व्यवस्थित तरीके से जारी हैं। चीन स्वतंत्र, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सूचनाएं सार्वजनिक करता रहा है। आपदा से निपटने के समय बदनाम करने वाली बातें और गलत सूचनाएं बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हैं।”

रविवार को तिब्बत के अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट में बुधवार को आई अचानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 49 भारतीयों समेत 546 लोग अब भी लापता हैं।

नेपाल ने सोमवार को बताया कि अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई, जबकि 4,247 लोग अभी भी लापता हैं। पिछले कई वर्षों से चीन को तिब्बत में अपनी जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। इनमें ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जा रहा 167.8 अरब अमेरिकी डॉलर का बांध भी शामिल है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना बताया गया है।

इस परियोजना का निर्माण पिछले साल जुलाई में शुरू हुआ था। इससे हर साल 300 अरब किलोवाट-घंटे से अधिक बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है, जो 30 करोड़ से अधिक लोगों की सालाना बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश