Donald Trump Tariff Refund: ट्रंप पर उन्हीं की टैरिफ नीति पड़ गई भारी, लौटाने पड़ सकते हैं 16 लाख करोड़ रुपये, पर क्यों आई ये नौबत..? यहां पढ़िए
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Donald Trump Tariff Refund: अमेरिका की व्यापारिक नीतियों को लेकर एक बड़ा कानूनी और आर्थिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसने वैश्विक बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी अदालत के हालिया फैसले ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Donald Trump Tariff Refund: अमेरिका की व्यापारिक नीतियों को लेकर एक बड़ा कानूनी और आर्थिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसने वैश्विक बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी अदालत के हालिया फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला उन आयात शुल्कों से जुड़ा है जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लागू किया था। अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि इन टैरिफ के तहत वसूला गया पैसा कंपनियों को वापस करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिकी सरकार के लिए अब तक के सबसे बड़े वित्तीय झटकों में से एक साबित हो सकता है।
Donald Trump News: जज रिचर्ड ईटन ने सुनाया फैसला
दरअसल, न्यूयॉर्क स्थित एक फेडरल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जज रिचर्ड ईटन ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों ने सरकार द्वारा लगाए गए अवैध या अमान्य टैरिफ का भुगतान किया है, उन्हें उसका रिफंड मिलने का अधिकार है। यह विवाद 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए आयात शुल्क से जुड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने इस कानून का उपयोग करते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैक्स लगाया था। सरकार का दावा था कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
हालांकि, इस मामले ने कानूनी मोड़ तब लिया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इन डबल-डिजिट आयात शुल्कों को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद फेडरल कोर्ट ने भी साफ कर दिया कि रिफंड का लाभ केवल उन कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा जिन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी, बल्कि उन सभी आयातकों को मिलेगा जिन्होंने इस कानून के तहत शुल्क का भुगतान किया है। इस फैसले ने हजारों कंपनियों को बड़ी राहत दी है, जो लंबे समय से इन टैरिफ को चुनौती दे रही थीं।
Donald Trump Tariff: आंकड़ा लगभग 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है
अगर इस फैसले के वित्तीय असर की बात करें तो इसका पैमाना बेहद बड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने दिसंबर के मध्य तक इन विवादित टैरिफ के जरिए लगभग 130 अरब डॉलर यानी करीब 12 लाख करोड़ रुपये की राशि वसूली थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर के बाद वसूली गई रकम को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा लगभग 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब 16.12 लाख करोड़ रुपये बैठती है। अगर अदालत के निर्देशों के अनुसार पूरा रिफंड देना पड़ा तो यह अमेरिकी सरकारी खजाने पर भारी बोझ डाल सकता है।
यह फैसला टेनेसी की फिल्टर निर्माता कंपनी ‘एटमस फिल्ट्रेशन’ के मामले की सुनवाई के दौरान आया। कंपनी ने अदालत में दावा किया था कि सरकार द्वारा लगाया गया टैरिफ कानून के दायरे से बाहर है। सुनवाई के दौरान ट्रंप प्रशासन ने इस रिफंड प्रक्रिया को धीमा करने के लिए कानूनी दलीलें भी दीं, लेकिन अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और मामले को जल्द निपटाने का आदेश दिया।
इस बीच ट्रंप प्रशासन भी इस फैसले के बाद नई रणनीति बनाने में जुट गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि सरकार आयात शुल्क को लेकर अपना रुख और सख्त कर सकती है। जानकारी के मुताबिक, पहले लागू किए गए 10 प्रतिशत यूनिवर्सल टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक करने की योजना तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि इस नए टैक्स ढांचे की घोषणा जल्द ही की जा सकती है।
हालांकि मौजूदा नियमों के अनुसार यह नया टैरिफ केवल 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है। इसी कारण अमेरिकी प्रशासन अब स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार ‘सेक्शन 301’ और ‘सेक्शन 232’ जैसे प्रावधानों का सहारा लेकर फिर से कड़े टैरिफ लागू कर सकती है। ये प्रक्रियाएं भले ही लंबी हों, लेकिन कानूनी रूप से ज्यादा मजबूत मानी जाती हैं।