ढाका, पांच फरवरी (एपी) बांग्लादेश में हाल के महीनों में हिंदुओं पर हुए हमले को मानवाधिकार समूह और हिंदू नेता 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले बढ़ते ध्रुवीकरण और इस्लाम समर्थकों के पुनरुत्थान के तौर पर देख रहे हैं।
कपड़े की एक फैक्टरी में काम करने वाले दीपू चंद्र दास (27) पर दिसंबर में कई मुस्लिम सहकर्मियों ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इन आरोपों के बाद हिंसक भीड़ उसके कार्यस्थल पर उमड़ पड़ी और पीटकर हत्या कर दी। उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई।
पूरे देश में, अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सदस्यों ने घटना के रिकॉर्ड किये गए दृश्यों को अपने मोबाइल फोन पर देखा और सहम गए। इस घटना को लेकर, ढाका और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे, प्रदर्शनकारियों ने न्याय और अधिक सुरक्षा की मांग की। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने जांच के आदेश दिए और पुलिस ने कहा कि लगभग एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
हालांकि, मानवाधिकार समूहों और हिंदू नेताओं का कहना है कि यह हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय पर हमलों में आई व्यापक वृद्धि का हिस्सा है, जिसे बढ़ते ध्रुवीकरण और इस्लामी कट्टरपंथियों के पुनरुत्थान ने हवा दी है। मुस्लिम बहुल देश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव के मद्देनजर हिंदुओं में भय और भी गहरा गया है।
बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगभग 1.31 करोड़ है, जो देश की 17 करोड़ आबादी का लगभग आठ प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम आबादी 91 प्रतिशत है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक संगठन है।
संगठन का कहना है कि उसने अगस्त 2024 में एक विद्रोह में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद से सांप्रदायिक हिंसा की 2,000 से अधिक घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है।
समूह ने कम से कम 61 हत्याओं, महिलाओं के खिलाफ हिंसा की 28 घटनाओं (जिनमें बलात्कार और सामूहिक बलात्कार शामिल हैं) और पूजा स्थलों पर तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी से जुड़े 95 हमलों को दर्ज किया है। इसने यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार पर इस तरह की हिंसा की रिपोर्ट को नियमित रूप से खारिज करने या तवज्जो नहीं देने का भी आरोप लगाया है।
संपर्क किये जाने पर यूनुस की प्रेस टीम के एक अधिकारी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने लगातार इस दावे को खारिज किया है कि वह अल्पसंख्यक समुदायों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है और इस बात पर जोर दिया है कि अधिकांश घटनाएं धार्मिक शत्रुता से प्रेरित नहीं हैं।
हिंदुओं के खिलाफ हमलों में वृद्धि बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी, जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन के पुनरुत्थान के साथ हुई है। तत्कालीन शेख हसीना सरकार के शासनकाल में प्रतिबंधों, गिरफ्तारियों और लगातार दमनकारी कार्रवाइयों के कारण वर्षों तक राजनीतिक हाशिये पर रहने के बाद, पार्टी इस चुनाव को अपना प्रभाव पुनः प्राप्त करने के अवसर के रूप में देख रही है।
जमात-ए-इस्लामी 11 दलों के एक व्यापक इस्लामी गठबंधन का नेतृत्व करती है, जिनमें छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) भी शामिल है, जिसके नेताओं ने 2024 के विद्रोह में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
एपी सुभाष सुरेश
सुरेश