गम और अपनों की तलाश के बीच बाढ़ से बचे नेपाल के लोग राहत-बचाव अभियान में जुटे

गम और अपनों की तलाश के बीच बाढ़ से बचे नेपाल के लोग राहत-बचाव अभियान में जुटे

गम और अपनों की तलाश के बीच बाढ़ से बचे नेपाल के लोग राहत-बचाव अभियान में जुटे
Modified Date: September 6, 2026 / 01:02 pm IST
Published Date: September 6, 2026 1:02 pm IST

नुवाकोट (नेपाल), छह सितंबर (भाषा) प्रियजनों को खोने के गम और लापता परिजनों की तलाश के बीच नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से बचे कई लोग अब दूसरों की मदद के लिए राहत एवं बचाव कार्यों में जुट गए हैं।

सुदीप कुमार न्यौपाने (31) उस विनाशकारी बाढ़ में बाल-बाल बच गए थे, जिसमें उनके छोटे भाई और एक करीबी सहयोगी बह गए।

‘द काठमांडू पोस्ट’ अखबार ने शनिवार को बताया कि दो दिन तक शोक मनाने के बाद न्यौपाने राहत कार्यों में शामिल हो गए और रसुवा में विस्थापित लोगों के बीच भोजन तथा अन्य जरूरी सहायता सामग्री के वितरण में मदद करने लगे।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन से 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी एवं मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं।

न्यौपाने बाढ़ आने की चेतावनी ग्रामीणों तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे। इसी दौरान वह अपने 27 वर्षीय भाई प्रदीप और एक परिचित जनक के साथ बाढ़ के तेज बहाव में फंस गए।

बाढ़ आने की चेतावनी मिलने के बाद तीनों सुरक्षित स्थान की ओर भाग रहे थे, लेकिन कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी वहां पहुंच गया और प्रदीप तथा जनक को बहा ले गया। न्यौपाने ऊपर की ओर भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

दो दिन तक शोक मनाने के बाद न्यौपाने फिर राहत कार्यों में जुट गए। विस्थापित लोगों को भोजन और आश्रय की जरूरत थी तथा स्थानीय प्रशासन के पास कर्मचारियों की भी कमी थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं किस्मत से बच गया। जब तक जीवित रहूंगा, समाज और लोगों की सेवा करता रहूंगा।’’

समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइनखबर’ ने बताया कि पड़ोसी जिले नुवाकोट में सुचित जोशी भी लगातार खोज एवं बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं, जबकि उनके अपने परिवार के चार सदस्य – पत्नी, सात वर्षीय बेटी, भाभी और भतीजा अब भी लापता हैं।

खोज अभियान के दौरान जोशी को अपने चाचा और एक अन्य भतीजे का पता चला। इसके बाद उनकी तलाश का अभियान व्यापक राहत एवं बचाव अभियान में बदल गया तथा पांच अन्य लोग उनकी टीम में शामिल हो गए। इस समूह ने बाढ़ में फंसे लोगों की मदद की और एक बुजुर्ग महिला को भी सुरक्षित बाहर निकाला, जो अपने घर के सामने बाढ़ के पानी में फंस गई थी।

जोशी सुरक्षाबलों के जवानों के साथ मिलकर अपने लापता परिजनों की तलाश भी जारी रखे हुए हैं। एक तलाशी अभियान के दौरान त्रिशूली नदी से तीन शव बरामद किए गए, लेकिन क्षत-विक्षत होने के कारण उनकी पहचान नहीं हो सकी।

अपने प्रियजनों की तलाश के साथ-साथ जोशी आपदा से प्रभावित अन्य लोगों की मदद भी लगातार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस दर्द को सह रहा हूं और फिर भी बचाव कार्य जारी रखे हुए हूं।’’

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल


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