Middle East War Impact: 6 महीेने में बढ़े खाने-पीने की इन चीजों के दाम, इकोनॉमिस्ट ने दे दी चेतावनी, कहा- 40 दिन से ज्यादा युद्ध चला तो बढ़ सकती है मुश्किलें

Middle East War Impact: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग के चलते होर्मुज बंद होने से पैदा हुए ग्लोबल तेल संकट ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

Middle East War Impact: 6 महीेने में बढ़े खाने-पीने की इन चीजों के दाम, इकोनॉमिस्ट ने दे दी चेतावनी, कहा- 40 दिन से ज्यादा युद्ध चला तो बढ़ सकती है मुश्किलें

Middle East War Impact/Image Credit: IBC24.in

Modified Date: April 4, 2026 / 06:32 pm IST
Published Date: April 4, 2026 6:29 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब हर देश में देखने के लिए मिल रहा है।
  • जंग के चलते होर्मुज बंद होने से पैदा हुए ग्लोबल तेल संकट ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
  • सितंबर 2025 के बाद से मार्च महीने में वैश्विक स्तर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतें हाई लेवल पर पहुंच गईं।

Middle East War Impact: नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब हर देश में देखने के लिए मिल रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग के चलते होर्मुज बंद होने से पैदा हुए ग्लोबल तेल संकट ने श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत अन्य कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) फूड प्राइस इंडेक्स के आकंड़े देखें, तो युद्ध के चलते दुनिया में खाने-पीने की चीजों के दाम छह महीने के हाई पर पहुंच गए हैं।

आने वाले महीनों में बढ़ सकती है परेशानी

बताया जा रहा है कि, सितंबर 2025 के बाद से मार्च महीने में वैश्विक स्तर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतें हाई लेवल पर पहुंच गईं। इसकी वजह से आने वाले महीनों में किराने पर खर्च और बिलों की स्थिति को लेकर लोगों के मन में चिंता पैदा हो रही है। एफएओ के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी हुई है, (Middle East War Impact) जो ग्लोबल फूड मार्केट में महंगाई के बढ़ते दबाव का संकेत है।

सबसे अहम बात ये है कि, जरुरी चीजों का मूल्य आकलन करने वाला मानक FAO Food Price Index बीते मार्च महीने में औसतन 128.5 अंक रहा, जो फरवरी से 2.4% और वार्षिक आधार पर 1% का इजाफा दर्शाता है। इसके पीछे बड़े कारण की बात करें, तो खासतौर पर वेस्ट एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतें, उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होना है।

FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट का बड़ा बयान

Middle East War Impact:  खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के मामले में FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो का बयान भी सामने आया है। मैक्सिमो टोरेरो ने कहा कि, मिडिल ईस्ट जंग शुरू होने के बाद से कीमतों में जो वृद्धि हुई है, उसका सबसे बड़ा कारण तेल की ऊंची कीमतें हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का फूड सिस्टम पर गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

खाद्य मंहगाई के पीछे के कारणों की बात करें,तो कच्चे तेल की हाई कीमतों से ट्रांसपोर्टेशन और (Middle East War Impact) प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ती है। इसके साथ ही बायोफ्यूल की डिमांड में भी इजाफा देखने को मिलता है और इससे वनस्पति तेल जैसी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। फर्टिलाइजर्स पर असर एक बड़ी चिंता का विषय है, जो किसानों के बुवाई प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

इन चीजों की कीमतों में हुआ इजाफा

वैश्विक स्तर परखाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के बारे में एक रिपोर्ट में बताया गया कि, प्रमुख रूप से खाद की बढ़ती लागत के कारन गेहूं की कीमतों में ग्लोबली 4.3% की वृद्धि हुई, तो एथेनॉल की डिमांड मजबूत होने से मक्का का भाव बढ़ा है। इसके अलावा वनस्पति तेल की कीमतों में सबसे तेज इजाफा देखने को मिला है, (Middle East War Impact) जो मासिक आधार पर 5.1% है. इसके अलावा सालाना आधार पर देखें, तो 13.2% की बढ़ोतरी देखने को मिली है। ये क्रूड प्राइस और बायोफ्यूल की डिमांड बढ़ने के चलते रही। मीट की कीमतों में 1% की वृद्धि हुई। डेयरी प्रोडक्ट्स की कीमतों में 1.2%, जबकि चीनी की कीमतों में 7.2% का उछाल आया।

इकोनॉमिस्ट ने टोरेरो दी वार्निंग

Middle East War Impact:  एफएओ ने खाद्य सप्लाई के लिए संभावित जोखिमों की चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक गेहूं उत्पादन 820 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.7% कम है। इसके साथ ही इकोनॉमिस्ट टोरेरो ने वार्निंग देते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में मौजूदा संघर्ष 40 दिनों से अधिक समय तक चलता है, तो इसका वास्तविक प्रभाव बाद में देखने को मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि किसान खाद का इस्तेमाल कम कर सकते हैं, बुवाई कम कर सकते हैं या कम लागत वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं। (Middle East War Impact) ये ऐसे फैसले हैं, जिनसे आने वाले महीनों में पैदावार कम हो सकती है और आपूर्ति सीमित हो सकती है। टोरेरो की मानें, तो फिलहाल फूड प्राइस में जो तेजी देखने को मिली है, वो डराने वाली नहीं है, लेकिन इन क्षेत्रों में लगातार दबाव वैश्विक स्तर पर खाद्य लागत में बड़ी वृद्धि का कारण बन सकता है।

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