ग्रीनलैंड के इनुइट दशकों से आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संघर्षरत

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ग्रीनलैंड के इनुइट दशकों से आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संघर्षरत

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  • Publish Date - January 29, 2026 / 01:10 PM IST,
    Updated On - January 29, 2026 / 01:10 PM IST

( सुजैन ए कैपलान एवं जेनेवीव लेमोइन, बौडोइन कॉलेज )

ब्रंसविक (अमेरिका), 29 जनवरी (द कन्वरसेशन) ग्रीनलैंड के स्वामित्व को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और यूरोपीय नेताओं के बीच खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इन सबके बीच वहां रहने वाले इनुइट समुदाय की आवाज हाशिए पर बनी हुई है। ग्रीनलैंड को अपना घर मानने वाले इनुइट दशकों से आत्मनिर्णय के अपने अधिकार की मांग करते आ रहे हैं।

ग्रीनलैंड की लगभग 57,000 आबादी में 90 प्रतिशत पश्चिमी ग्रीनलैंड के कलाल्लीत, पूर्वी ग्रीनलैंड के तुनुमी और उत्तरी ग्रीनलैंड के इनुघुइट हैं। स्थानीय भाषा में ग्रीनलैंड को ‘कलाल्लीत नुनाआत’ कहा जाता है, जिसे एक स्वदेशी राष्ट्र माना जाता है।

इतिहास के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड लगभग 5,000 वर्षों तक द्वीप में प्रवेश का प्रमुख मार्ग रहा। करीब 1,000 वर्ष पहले वर्तमान इनुइटों के पूर्वज यहां पहुंचे और उन्होंने उन्नत तकनीकों के सहारे कठोर आर्कटिक परिस्थितियों में जीवन को आगे बढ़ाया।

कयाक, कुत्तों द्वारा खींची जाने वाली स्लेज, जटिल हारपून और पशुओं की खाल से बने विशेष परिधान उनके जीवन का अहम हिस्सा थे। इनुइटों की संस्कृति में मानव और पशु के बीच गहरी पारस्परिक निर्भरता को महत्व दिया गया।

दक्षिणी ग्रीनलैंड में 986 ईसवी में एरिक द रेड ने नॉर्स बस्ती की स्थापना की। समय के साथ नॉर्स और इनुइट समुदायों के बीच संपर्क और व्यापार हुआ, हालांकि संबंध हमेशा शांतिपूर्ण नहीं रहे। 14वीं सदी में जलवायु के ठंडा होने के साथ नॉर्स लोग ढल नहीं पाए और साल 1500 तक पूरी तरह गायब हो गए, जबकि इनुइट समुदाय अपनी लचीली जीवनशैली के कारण क्षेत्र में बना रहा।

18वीं सदी में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में उपनिवेशी शासन मजबूत किया। 1776 में रॉयल ग्रीनलैंड ट्रेडिंग डिपार्टमेंट की स्थापना के बाद पश्चिमी तट को लंबे समय तक एक बंद उपनिवेश के रूप में संचालित किया गया। 19वीं सदी तक राजधानी नूक में एक शिक्षित कलाल्लीत वर्ग उभरा, लेकिन शासन डेनिश प्रशासन के हाथ में ही रहा।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1916 में अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के दावे को मान्यता दी। 1921 में डेनमार्क ने पूरे ग्रीनलैंड पर संप्रभुता घोषित की, जिसे 1933 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने बरकरार रखा। हालांकि विडंबना यह रही कि इन फैसलों में ग्रीनलैंडवासियों की राय शामिल नहीं की गई।

द्वितीय विश्व युद्ध और शीत युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व बढ़ा। अमेरिकी सैन्य अड्डों की स्थापना के परिणामस्वरूप कुछ इनुइट परिवारों को जबरन स्थानांतरित किया गया। डेनमार्क ने 1953 में ग्रीनलैंड को उपनिवेश से हटाकर अपने एक काउंटी का दर्जा दे दिया और निवासियों को नागरिक अधिकार मिले, लेकिन इसके साथ ही डेनिश भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की नीतियां अपनाई गईं।

ग्रीनलैंड को 1979 में हुए जनमत संग्रह में ‘होम रूल’ मिला और 2009 में इसे स्वशासन में परिवर्तित किया गया, जिससे भविष्य में पूर्ण स्वतंत्रता का मार्ग खुला।

आज ग्रीनलैंड के नेता स्पष्ट रूप से आत्मनिर्णय की मांग दोहरा रहे हैं और यह संदेश अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया जा रहा है। लेकिन यह संदेश कहीं न कहीं अनदेखा ही रह जाता है। ग्रीनलैंड पर दावे वाली बातें ही सुर्खियां बन जाती हैं और आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए दशकों से जारी इनुइट समुदाय का संघर्ष खबरों में आ ही नहीं पाता।

(द कन्वरसेशन) मनीषा खारी

खारी