Reported By: Santosh Tiwari
,Chhattisgarh Police-Naxalites Encounte || Image- IBC24 News File
बीजापुर: छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के आधार पर जिला पुलिस बल ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। (Chhattisgarh Police-Naxalites Encounter) यह अभियान 28 जनवरी 2026 की तड़के शुरू किया गया, जिसमें जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की विशेष टीम को नक्सल प्रभावित इलाके में रवाना किया गया।
सूत्रों के अनुसार, सर्च अभियान के दौरान जब डीआरजी की टीम जंगल क्षेत्र में आगे बढ़ रही थी, तभी सुबह करीब 7 बजे माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में डीआरजी जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए माओवादियों पर फायरिंग की। दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी होने की सूचना है, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर ली है और माओवादियों के संभावित भागने के रास्तों को बंद करने के लिए अतिरिक्त बलों को भी मौके पर भेजा गया है। (Chhattisgarh Police-Naxalites Encounter) घना जंगल और दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण अभियान को पूरी सतर्कता और रणनीति के साथ अंजाम दिया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान सभी सुरक्षा बल सुरक्षित हैं और ऑपरेशन वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चल रहा है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अभियान क्षेत्र से दूर रहें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। फिलहाल सर्च ऑपरेशन और मुठभेड़ जारी है। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद संभावित नुकसान, बरामदगी और अन्य विवरणों से संबंधित पूरी जानकारी अलग से साझा की जाएगी। पुलिस ने कहा है कि नक्सल उन्मूलन के लिए इस तरह के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।
बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि सीसी लीडर्स में गणपति या मुपल्ला लक्ष्मण राव या रमन्ना हैं, जो पार्टी का पूर्व महासचिव भी है, बाकि थिप्पिरी तिरुपति या देवजी या सुदर्शन, मिसिर बेसरा या भास्कर, और मल्लाराजी रेड्डी या सतान्ना है। देवजी वर्तमान में एक्टिंग जनरल सेक्रेटरी माना जा रहा है। (Chhattisgarh Police-Naxalites Encounter) एक साल पहले, सीपीआई की केंद्रीय समिति में 21 सदस्य थे, जिसमें अलग-अलग इकाइयों के टॉप लीडर शामिल हैं। 1 जनवरी 2025 से 26 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग राज्यों में 12 लोग मारे गए और पांच ने सरेंडर कर दिया। चार लोग जिन पर कम से कम 1 करोड़ रुपये का इनाम है उनकी तलाश जारी है। बताते चलें कि 2003 से 2010 के बीच माओवादियों की केंद्रीय समिति में 40-45 सदस्य थे।
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