आराम की अवस्था में हृदय गति की भी अपनी छिपी लय होती है: विश्लेषण
आराम की अवस्था में हृदय गति की भी अपनी छिपी लय होती है: विश्लेषण
(फिलिप्पा करॉली, मेलबर्न विश्वविद्यालय)
मेलबर्न, 14 सितंबर (द कन्वरसेशन) आपने संभवतः ‘सर्केडियन रिदम’ यानी शरीर की उस 24 घंटे की जैविक घड़ी के बारे में सुना होगा, जो हमारी नींद और जागने के चक्र को नियंत्रित करती है।
लेकिन अब यह सामने आया है कि आराम की अवस्था में हृदय की गति भी ऐसी रहस्यमयी और लंबी अवधि वाली लय का अनुसरण करती है, जो बाहरी दुनिया से स्वतंत्र रूप से चलती है। आराम की अवस्था में हृदय गति से आशय उस समय प्रति मिनट दिल की धड़कनों की संख्या से है, जब व्यक्ति शांत और निष्क्रिय अवस्था में हो। यह माप तनाव, थकान और शारीरिक फिटनेस से जुड़ा होता है।
‘ईबायोमेडिसिन’ में प्रकाशित हमारे नए अध्ययन में सैकड़ों युवाओं के कई वर्षों के ‘स्मार्टवॉच’ के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पता चला कि 70 प्रतिशत प्रतिभागियों की आराम की अवस्था वाली हृदय गति एक धीमी जैविक लय का अनुसरण करती थी।
‘स्मार्टवॉच’ यानी ऐसी डिजिटल घड़ी जो समय बताने के साथ-साथ शरीर और दैनिक गतिविधियों से जुड़ी कई जानकारियां भी दर्ज करती है।
इन लय में सप्ताह, महीने या यहां तक कि 10 सप्ताह तक के अलग-अलग चक्र पाए गए। इन चक्रों के दौरान प्रति मिनट दिल की गति एक निश्चित क्रम के अनुसार बढ़ती और घटती रही।
इन चक्रों की पहचान से मानव शरीर की जैविक समय-व्यवस्था के बारे में हमारी समझ का विस्तार होता है और इसका इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
हमारी कई आंतरिक घड़ियां
मानव जैविक समय से आशय शरीर की उन प्रणालियों से है, जो घड़ी या कैलेंडर से अलग हमारे भीतर समय का निर्धारण करती हैं। अलग-अलग समय क्षेत्रों में जाने या लंबी हवाई यात्रा का अनुभव होने पर हमारे शरीर की यह आंतरिक समय-व्यवस्था अधिक स्पष्ट रूप से सामने आती है।
जैविक समय का निर्धारण मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों में मौजूद आंतरिक ‘घड़ियां’ करती हैं। ये घड़ियां भूख से लेकर हार्मोन के स्तर तक शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करती हैं। ऐसी ही घड़ियां अधिकांश जीवित प्राणियों में भी पाई जाती हैं और वे सूर्य के प्रकाश, चांदनी तथा ज्वार या ऋतुओं के चक्र जैसे बाहरी पर्यावरणीय बदलावों के साथ तालमेल करती हैं।
‘सर्केडियन’ यानी 24 घंटे की जैविक लय सबसे अधिक जानी-पहचानी लय है, लेकिन इससे लंबी अवधि वाले चक्र भी प्रकृति में पाए जाते हैं। इन्हें ‘इन्फ्राडियन रिदम’ या ‘दैनिक चक्र से धीमी लय’ कहा जाता है। महिलाओं का प्रजनन चक्र इसका एक उदाहरण है। कुछ जानवरों में प्रवास और शीतनिद्रा के तौर-तरीके भी ऐसी ही जैविक लय के उदाहरण हैं।
पिछले अध्ययनों में यह देखा गया है कि ‘इन्फ्राडियन’ लय किस तरह मिर्गी के दौरे, दिल के दौरे और मानसिक रोगों से जुड़ी घटनाओं जैसे रोगों के लक्षणों को प्रभावित करती हैं। इन चक्रों पर नजर रखने से उन अवधियों का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिल सकती है, जब किसी व्यक्ति में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा, इनका इस्तेमाल उपचार को अधिक लक्षित बनाने के लिए भी किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय ‘माई सीजर गेज’ संघ के तहत हमारी टीम ने मिर्गी के दौरों के चक्र पर नजर रखने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य उपकरण विकसित किए हैं और इनके नैदानिक परीक्षण फिलहाल जारी हैं।
अब लोगों के बीच ‘स्मार्टवॉच’ का बढ़ता इस्तेमाल मानव शरीर की जैविक लय और बड़े पैमाने पर उन्हें मापने के तरीकों पर शोध को नयी गति दे रहा है।
हमें क्या पता चला?
‘इन्फ्राडियन रिदम’ का पता लगाने के लिए कई वर्षों के आंकड़ों की जरूरत होती है, क्योंकि हर व्यक्ति का चक्र अलग होता है और उसके दोहरने में काफी समय लगता है। यही वजह है कि इन्हें ‘सर्केडियन रिदम’ की तुलना में मापना अधिक कठिन है। ‘सर्केडियन रिदम’ लगभग सभी लोगों में समान होती है और हर दिन दोहराती है।
महिलाओं और पुरुषों, दोनों में पाई जाने वाली हृदय गति की ये लय ‘इन्फ्राडियन रिदम’ का एक नया प्रकार हैं। विज्ञान अभी इन्हें पूरी तरह समझा नहीं सका है, लेकिन ये हमारे स्वास्थ्य और जीवन-कल्याण को प्रभावित करती हैं।
इस अध्ययन के लिए हमने अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम’ की ‘नेटहेल्थ’ परियोजना के तहत एकत्र किए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया। ‘स्मार्टवॉच’ की मदद से इस परियोजना में करीब 600 कॉलेज छात्रों की दो से चार वर्षों तक निगरानी की गई थी।
हमारे अध्ययन में समय के साथ लोगों की रोजाना की आराम की अवस्था वाली हृदय गति का विश्लेषण ‘स्पेक्ट्रल’ विश्लेषण नामक तकनीक से किया गया। इसे इस तरह समझ सकते हैं, जैसे सफेद रोशनी को अलग-अलग रंगों में बांट दिया जाए और हर रंग एक अलग चक्र का प्रतिनिधित्व करे—लाल रंग धीमे चक्रों का और बैंगनी रंग तेज चक्रों का। हमारा उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के प्रमुख ‘रंग’ यानी प्रमुख जैविक लय की पहचान करना था।
अध्ययन में शामिल 525 में से 369 प्रतिभागियों में आराम की अवस्था वाली हृदय गति की एक प्रमुख लय पाई गई। इनकी अवधि एक सप्ताह से लेकर एक वर्ष तक थी। अपने चक्र के दौरान किसी व्यक्ति की आराम की अवस्था वाली हृदय गति उच्चतम और निम्नतम स्तर के बीच प्रति मिनट 15 धड़कन तक बदल सकती थी।
हालांकि, हर व्यक्ति की अपनी अलग लय थी, लेकिन तीन प्रमुख समूह सामने आए। इनमें 13 प्रतिशत लोगों की लय लगभग साप्ताहिक, 37 प्रतिशत की मासिक और 50 प्रतिशत लोगों की लय इससे भी लंबी, यानी कई महीनों की अवधि वाली थी।
हमारे पर्यावरण के साथ तालमेल
अध्ययन के कुछ निष्कर्ष हृदय गति में होने वाले उन बदलावों के अनुरूप थे, जिनके बारे में हमें पहले से जानकारी है। हमें पता लगा कि वार्षिक चक्र आम तौर पर ऋतुओं के साथ तालमेल करते है- गर्मियों में आराम की अवस्था वाली हृदय गति कम रही। इसी तरह साप्ताहिक चक्र सप्ताहांत के साथ मेल खाते दिखे।
महिलाओं में मासिक हृदय गति चक्र अक्सर उनके मासिक धर्म चक्र के अनुरूप मिले। हालांकि, मासिक हृदय गति चक्र वाले समूह में 20 प्रतिशत पुरुष थे। इससे संकेत मिलता है कि मासिक चक्रों को भी केवल प्रजनन हार्मोन के आधार पर नहीं समझाया जा सकता।
ये निष्कर्ष महिलाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। वे बताते हैं कि महीने-दर-महीने सामने आने वाले लक्षणों का संबंध जरूरी नहीं कि सीधे मासिक धर्म चक्र से हो। चक्रीय रूप से सामने आने वाले लक्षणों के कारण की सही पहचान और उपचार के लिए प्रजनन तंत्र से परे काम करने वाली ‘इन्फ्राडियन रिदम’ के प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है। चक्रीय रूप से सामने आने वाले लक्षणों में मिर्गी के दौरे, मानसिक रोगों से जुड़ी घटनाएं या दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज महसूस होना शामिल हो सकता है।
व्यापक रूप से देखें तो ये प्रमाण संकेत देते हैं कि कैलेंडर के चक्र हृदय गति की लय का कारण बनने के बजाय उसे प्रभावित करने वाले एक ‘संकेत’ की तरह काम करते हैं। चूंकि जैविक लय हमारे पर्यावरण के साथ तालमेल बिठाने के लिए बनी हैं, इसलिए संभव है कि हृदय गति के चक्र शरीर को समय का एहसास बनाए रखने में मदद करने वाले कुछ संकेतों के साथ तालमेल बिठाते हों।
इसी तरह, एक ही मित्र समूह के लोगों में भी हृदय गति के चक्र अधिक समान पाए गए। हालांकि, पर्यावरणीय या सामाजिक संकेत मौजूद न होने पर भी शरीर के भीतर की प्रक्रियाएं हमारी जैविक गतिविधियों को धीमी लय के साथ तालमेल में बनाए रखती हैं।
यह अध्ययन इस महत्वपूर्ण सवाल को जन्म देता है कि हमारी हृदय गति में धीरे-धीरे होने वाले इन बदलावों के साथ शरीर में और क्या-क्या बदल हो सकता है। हमारी प्रयोगशाला में हम यह पता लगा रहे हैं कि ‘इन्फ्राडियन रिदम’ लोगों के मूड, तनाव और बीमारियों के जोखिम को किस तरह प्रभावित करती हैं।
अगर आप स्मार्टवॉच का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने आंकड़े अपलोड करके यह भी पता लगा सकते हैं कि आपके हृदय की धड़कनों में कोई छिपी हुई लय मौजूद है या नहीं।
द कन्वरसेशन
खारी नरेश
नरेश

Facebook


