नेपाल में ऊंचाई पर स्थित हिमनद टूटने से अचानक आई विनाशकारी बाढ़: चीन

नेपाल में ऊंचाई पर स्थित हिमनद टूटने से अचानक आई विनाशकारी बाढ़: चीन

नेपाल में ऊंचाई पर स्थित हिमनद टूटने से अचानक आई विनाशकारी बाढ़: चीन
Modified Date: August 28, 2026 / 08:17 pm IST
Published Date: August 28, 2026 8:17 pm IST

बीजिंग, 28 अगस्त (भाषा) चीन ने शुक्रवार को कहा कि नेपाल में ऊंचाई पर स्थित एक हिमनद के टूटने से अचानक भीषण बाढ़ आई, जिसने तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।

इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

बाढ़ से हुई तबाही में मरने वालों की संख्या 547 को पार कर गई है। इस बीच, भोटेकोशी नदी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद नेपाल के अधिकारियों ने नयी चेतावनी जारी की है।

चीन ने शुक्रवार को बताया कि तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा पर स्थित एक भूपत्तन क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ में पांच लोगों की मौत हो गई और 260 विदेशियों समेत 558 लोग अब भी लापता हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने गौर किया है कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों तथा आधिकारिक संस्थानों ने आपदा के कारण का प्रारंभिक आकलन किया है। उनके विश्लेषण के अनुसार, नेपाल में ऊंचाई पर स्थित एक हिमनद के टूटने से यह आपदा आई।’’

चीन के इस रुख से संकेत मिलता है कि क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक के कारण को लेकर अलग-अलग खबरों और अटकलों के बीच इस मामले में बीजिंग और काठमांडू की राय समान है।

वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि हिमनद टूटने और चट्टानों के खिसकने एवं हिमस्खलन से नेपाल की भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ अचानक कैसे आई। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिला है कि मलबे से ल्हेंदे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो गया होगा और इससे बना प्राकृतिक बांध बाद में टूट गया।

बुधवार को रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ का पानी नीचे की ओर तेजी से बढ़ा जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और नदी के रास्ते में कई पुल तथा अन्य बुनियादी ढांचे तबाह हो गए। बाढ़ ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई।

रसुवागढ़ी में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद शुरुआती तौर पर माना गया था कि इसकी वजह हिमनद झील का फटना (जीएलओएफ) या हिमस्खलन हो सकता है।

‘द काठमांडू पोस्ट’ समाचार पत्र के अनुसार, उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण कर रहे वैज्ञानिकों का हालांकि अब यह मानना है कि बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा ल्हेंदे नदी में गिरा होगा, जिससे उसका प्रवाह कुछ समय के लिए रुक गया और एक प्राकृतिक बांध बन गया, जो बाद में टूट गया।

खबर के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने भी चट्टानों के खिसकने एवं हिमस्खलन को इस आपदा का सबसे संभावित कारण बताया है।

नेपाल के अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के बृहस्पतिवार को जारी संशोधित विश्लेषण में हिमनद टूटने और मलबे के तेज बहाव को आपदा का कारण बताया गया।

तिब्बत की यात्रा पर गए भारत के लापता और फंसे पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों के बारे में पूछे जाने पर लिन ने कहा, ‘‘विवरण की पुष्टि की जा रही है। हमने संबंधित देशों के दूतावासों को पहले ही सूचना दे दी है और हम उनके संपर्क में रहेंगे।’’

सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित तिब्बत-नेपाल सीमा के पास ग्यिरोंग काउंटी से 555 पर्यटकों समेत 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, अब इस इलाके में कोई पर्यटक फंसा नहीं है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी इस आपदा को लेकर नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को शोक संदेश भेजा।

भाषा

सिम्मी माधव

माधव


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