पीएमएल-एन के इफ्तिखार गिलानी पीओके के ‘प्रधानमंत्री’ निर्वाचित
पीएमएल-एन के इफ्तिखार गिलानी पीओके के ‘प्रधानमंत्री’ निर्वाचित
इस्लामाबाद, 28 अगस्त (भाषा) बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को शुक्रवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के तथाकथित प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया।
क्षेत्र की तथाकथित विधानसभा के लिए चुनाव 27 जुलाई, दो अगस्त और तीन अगस्त को तीन चरणों में हुए थे। इन चुनावों के दौरान हिंसक प्रदर्शन हुए थे और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप भी लगे थे।
सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के उम्मीदवार गिलानी ने क्षेत्र की राजधानी मुजफ्फराबाद में तथाकथित विधानसभा में 44 में से 30 मत हासिल किए।
उनके प्रतिद्वंद्वी, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के मुख्तार अहमद को 14 मत मिले।
विधानसभा में कुल 53 सदस्य हैं, लेकिन वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या 46 है, क्योंकि पुंछ और सुधनौती जिलों की सात सीट पर चुनाव अभी तक नहीं हो पाए हैं। अधिकारियों ने इसकी वजह कानून-व्यवस्था की स्थिति बताई है।
शुक्रवार को मतदान में केवल 44 सदस्यों ने हिस्सा लिया, क्योंकि अध्यक्ष ने अपना वोट नहीं डाला, जबकि पीएमएल-एन के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर ने अपनी पार्टी के साथ मतभेदों के चलते विधानसभा सत्र में हिस्सा नहीं लिया।
पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ ने बृहस्पतिवार को तथाकथित प्रधानमंत्री पद के लिए गिलानी को नामित किया था।
गिलानी जिस सीट से सीधे चुनाव लड़े थे, वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन बाद में वह तकनीकीविद् सीट से विधानसभा के लिए निर्वाचित हो गए थे।
पीओके विधानसभा में कुल 53 सीट हैं। इनमें 45 सीट पर सीधे चुनाव होता है, जबकि आठ सीट महिलाओं, तकनीकविदों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं।
‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग जून की शुरुआत से ही पीओके में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा अधिकारियों की मौत हो चुकी है। क्षेत्रीय सरकार ने जून में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
जेएएसी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीट के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही है। गिलानी का निर्वाचन इस विरोध को और भड़का सकता है, क्योंकि वह सामान्य सीट से चुनाव हारने के बाद एक आरक्षित सीट से निर्वाचित हुए हैं।
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तहत संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। नयी दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर ‘‘अवैध और जबरन कब्जा’’ किया हुआ है।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव

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