ब्रिटेन की नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी में दादाभाई नौरोजी का ऐतिहासिक चित्र प्रदर्शित किया जाएगा

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ब्रिटेन की नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी में दादाभाई नौरोजी का ऐतिहासिक चित्र प्रदर्शित किया जाएगा

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 06:57 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 06:57 PM IST

लंदन, 26 अगस्त (भाषा) ब्रिटिश संसद के पहले भारतीय सदस्य और मशहूर राष्ट्रवादी नेता दादाभाई नौरोजी का एक ऐतिहासिक चित्र लंदन की नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा।

कलाकार सोराब एम पिथावाला का बनाया यह चित्र मध्य लंदन में द स्ट्रैंड स्थित ‘इंडिया क्लब’ रेस्तरां में 70 साल से अधिक समय तक प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था। हालांकि, यह रेस्तरां तीन साल पहले अपना पट्टा बढ़वाने की कोशिश में नाकाम रहा था।

इसके बाद ‘इंडिया क्लब’ के प्रबंधक यादगार मार्कर ने प्रतिष्ठित चित्र के प्रदर्शन के लिए एक नयी जगह खोजने के मकसद से लंदन की मशहूर नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी से संपर्क करने का फैसला किया, जहां दुनिया का सबसे बेहतरीन चित्र संग्रह मौजूद है। यह गैलरी अगले बुधवार से आम लोगों के लिए खुल जाएगी।

मार्कर ने बताया, “नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी का प्रबंधन इस बात से बहुत खुश था कि उससे संपर्क किया गया, क्योंकि अब तक उसके पास दादाभाई का सिर्फ एक छोटा-सा स्केच उपलब्ध था।”

उन्होंने कहा, “कोर्टाल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट के ‘पेंटिंग पेयर्स प्रोग्राम’ के तहत इस चित्र को फिर से उसके वास्तविक स्वरूप में ढाला गया। इस दौरान दादाजी की जिंदगी और शख्सियत के बारे में भी काफी छानबीन की गई।”

मार्कर ने कहा, “हमें बहुत खुशी है कि इस चित्र को एक नया ठिकाना मिल गया है, जहां दादाभाई नौरोजी की उपलब्धियों के बारे में जाना और सराहा जाएगा।”

दादाभाई नौरोजी की तरह की पारसी समुदाय से आने वाले मार्कर परिवार ने नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी को यह चित्र तीन साल के लिए उपलब्ध कराया है और उम्मीद है कि यह अवधि आगे भी बढ़ाई जाएगी।

इस चित्र को ‘एंपायर एंड रेजिस्टेंस गैलरी’ के रूम नंबर 23 में प्रदर्शित किया जाएगा, जहां ब्रिटिश साम्राज्य और उसके खिलाफ हुए प्रतिरोध की कहानी बयां करने वाले चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।

नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी में 19वीं सदी के संग्रह की वरिष्ठ क्यूरेटर सारा मोल्डन ने कहा, “हमें दादाभाई नौरोजी का यह चित्र प्रदर्शित करते हुए बहुत खुशी हो रही है, जो विक्टोरिया और एडवर्ड दौर में ब्रिटिश राजनीति की बहुत उल्लेखनीय शख्सियत थे।”

भाषा पारुल सुभाष

सुभाष