आंध्र सरकार ने खरीफ फसलों पर अल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए चार स्तरीय रणनीति अपनाई

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आंध्र सरकार ने खरीफ फसलों पर अल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए चार स्तरीय रणनीति अपनाई

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 06:59 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 06:59 PM IST

अमरावती, 26 अगस्त (भाषा) आंध्र प्रदेश के कृषि विभाग ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 में खरीफ की फसल पर अल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए चार स्तरीय रणनीति अपनाई है। इसके तहत जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल खेती, सहायक गतिविधियों और फसल बीमा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

कृषि विभाग ने बताया कि राज्य की 62 प्रतिशत आबादी कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है, जबकि वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 237 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।

विभाग ने कहा कि इस क्षेत्र को अल नीनो के प्रभाव से बचाना उसकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।

एक प्रेस विज्ञप्ति में विभाग ने कहा, ‘‘हमने 2026 में खरीफ की फसल पर अल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए जोखिम के आधार पर चार स्तरीय रणनीति अपनाई है। इसमें जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूल खेती, सहायक क्षेत्रों की सुरक्षा और फसल बीमा पर ध्यान दिया गया है।”

कृषि विभाग ने कहा कि अल नीनो के कारण मानसून के कमजोर होने या देर से आने या अनियमित होने की संभावना रहती है जिससे बारिश पर निर्भर खरीफ की फसलों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने 11 जून को आधिकारिक रूप से अल नीनो की शुरुआत की घोषणा की थी। वहीं, आईआरआई मॉडल के अनुसार इस घटना के वर्ष 1997-98 के अल नीनो जितना मजबूत होने की संभावना जताई गई थी।

आंध्र प्रदेश में 1 जून से 25 अगस्त के बीच सामान्य से 51 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर बारिश में कमी 13 प्रतिशत रही। राज्य के सभी 28 जिले बारिश की कमी से प्रभावित रहे। इनमें 25 जिले कमी की श्रेणी में और तीन जिले भारी कमी की श्रेणी में रहे।

राज्य सरकार ने सात अगस्त को पूरे आंध्र प्रदेश में अल नीनो के प्रभाव को कम करने की कार्य योजना की शुरुआत की।

इस अभियान के तहत सभी 8,489 रायथु सेवा केंद्रों (आरएसके) और 18,513 गांवों को शामिल किया गया है, ताकि हर किसान और कृषि क्षेत्र तक पहुंच बनाई जा सके।

विभाग ने बताया कि लक्षित 2.7 करोड़ खेतों में से 2.6 करोड़ (96.9 प्रतिशत) का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।

फसल स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े 14.3 लाख एकड़ क्षेत्र के लिए अपडेट किए गए हैं। इनमें से 1.1 लाख एकड़ क्षेत्र प्रभावित पाया गया है। इसमें 87,686 एकड़ में नमी की कमी, 15,250 एकड़ में फसल मुरझाने और 3,731 एकड़ में फसल सूखने की स्थिति सामने आई है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कुरनूल और नांदयाल जिले हैं।

सरकार के उपायों में जीवन रक्षक सिंचाई, सुरक्षात्मक छिड़काव, मल्चिंग (खेत की नमी बनाए रखने की प्रक्रिया), पोषक तत्व और पौध संरक्षण सहायता, मानसून पूर्व शुष्क बुआई, बीज छिड़काव, कम अवधि वाली वैकल्पिक फसलें और दोबारा बुआई शामिल हैं।

भाषा संतोष माधव

माधव