होर्मुज़ की खाड़ी में नौसैनिक युद्ध कानून कैसे लागू होता है

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होर्मुज़ की खाड़ी में नौसैनिक युद्ध कानून कैसे लागू होता है

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 04:11 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 04:11 PM IST

( नताली क्लीन, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी )

केनसिंगटन (ऑस्ट्रेलिया), 19 मार्च (द कन्वरसेशन) होर्मुज़ की खाड़ी, ईरान और ओमान के पास स्थित एक संकीर्ण जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।

इन दिनों जारी पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान सुर्खियों में आया यह मार्ग विश्व व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्यात की गई तेल, गैस और उर्वरक जैसी सामग्री इस मार्ग से हो कर गुजरती है। सबसे संकीर्ण बिंदु पर यह मार्ग केवल 21 समुद्री मील (39 किलोमीटर) चौड़ा है।

हाल ही में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के चलते ईरान ने इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही को सीमित कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं के व्यापार पर असर पड़ा है।

अब अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सवाल उठता है कि क्या ईरान ऐसा कर सकता है और क्या अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के लिए सैन्य काफिले भेज सकता है?

होर्मुज़ की खाड़ी का इस्तेमाल उच्च समुद्र क्षेत्रों के बीच अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए किया जाता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसे अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र माना जाता है। इस पानी पर तटवर्ती देशों का संप्रभुत्व होता है, लेकिन अन्य देशों के जहाजों को यहां से गुजरने का अधिकार होता है। तटवर्ती देशों को इनके मार्ग में किसी भी तरह की बाधा डालने की अनुमति नहीं है।

सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में, सशस्त्र संघर्ष का कानून या अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून लागू होता है, जिसमें नौसैनिक युद्ध कानून भी शामिल है। अधिकतर देशों द्वारा 1994 में अपनाए गए सैन रेमो मैनुअल का पालन किया जाता है, जो सशस्त्र संघर्ष के समय समुद्री कानून का मार्गदर्शन करता है।

इस कानून के तहत, देश आमतौर पर युद्धरत और तटस्थ श्रेणी में विभाजित होते हैं। तटस्थ देशों के जहाज, यहां तक कि उनके युद्धपोत, युद्धरत जलसंधि से गुजर सकते हैं। उन्हें यह सलाह दी जाती है कि तटस्थ युद्धपोत अपनी यात्रा के बारे में सूचना दें। कानून के अनुसार, युद्धरत देशों को तटस्थ जहाजों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

होर्मुज़ की खाड़ी के ईरानी क्षेत्र को युद्धकाल में नौसैनिक युद्ध क्षेत्र माना जाता है। युद्धरत देशों के लिए तटस्थ देशों के वैध अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक है। हालांकि, तटस्थ देशों के वाणिज्यिक जहाजों की कानूनी सुरक्षा कमजोर है, और इस कारण कई जहाज जलसंधि से गुजरने से बचते हैं।

सैन रेमो मैनुअल के अनुसार, तटस्थ देशों के स्वामित्व वाले खाड़ी क्षेत्र सभी जहाजों के लिए खुले रहने चाहिए, लेकिन युद्धरत देशों के खाड़ी क्षेत्र बंद रखे जा सकते हैं।

आमतौर पर युद्धपोत वाणिज्यिक जहाजों के साथ चलते हैं ताकि उन्हें हमलों से बचाया जा सके। अगर एक वाणिज्यिक जहाज युद्धरत देश के युद्धपोत के साथ काफिले में चले, तो वह भी कानूनी रूप से लक्ष्य बन सकता है। तटस्थ देशों के युद्धपोत द्वारा सुरक्षा प्राप्त वाणिज्यिक जहाज लक्ष्य नहीं माने जाते, लेकिन युद्धरत देश यह विचार कर सकता है कि क्या वे दुश्मन तक प्रतिबंधित सामग्री ले जा रहे हैं।

यदि ऑस्ट्रेलिया ईरानी हमलों के खिलाफ संयुक्त रक्षा के लिए संयुक्त अरब अमीरात की मदद करता है, तो ईरान इसे युद्ध में शामिल मान सकता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत और उनकी सुरक्षा प्राप्त वाणिज्यिक जहाज कानूनी रूप से ईरान के हमले की जद में आ सकते हैं।

कुल मिलाकर, होर्मुज़ की खाड़ी में शांति और युद्ध दोनों परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून और नौसैनिक युद्ध कानून के प्रावधान महत्वपूर्ण हैं, और तटस्थ तथा युद्धरत देशों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा पवनेश

पवनेश