( एडुअर्डो बी सैंडोवल, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी )
सिडनी, 20 फरवरी (द कन्वरसेशन) पिछले वर्ष नॉर्वे-अमेरिका की प्रौद्योगिकी कंपनी वनएक्स ने एक अनोखे उत्पाद की घोषणा की — “दुनिया का पहला मानवनुमा रोबोट, जो घरेलू जीवन को बदलने के लिए बनाया गया है।”
कुल 168 सेंटीमीटर लंबा और 30 किलोग्राम वजनी ‘नियो’ नामक इस रोबोट की कीमत लगभग 20,000 अमेरिकी डॉलर है और यह कपड़े तह करने और बर्तन धोने जैसी घरेलू गतिविधियों को स्वचालित ढंग से करने का दावा करता है।
नियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रणाली अंतर्निहित है, लेकिन जटिल कार्यों के लिए कंपनी का एक कर्मचारी वर्चुअल रियलिटी हेलमेट पहनकर उसे दूरस्थ रूप से नियंत्रित करता है। इस दौरान ऑपरेटर घर के भीतर, रोबोट जो भी देखता है, उसे देख सकता है और यह प्रक्रिया भविष्य में सीखने के लिए रिकॉर्ड भी की जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष अन्य घरेलू मानवनुमा रोबोट भी बाजार में आ सकते हैं। हालांकि, नियो उन चुनौतियों को उजागर करता है जो हालिया एआई उछाल में देखने को मिली हैं—भारी प्रचार के साथ सीमित क्षमताओं वाले उत्पाद, गोपनीयता से जुड़े छिपे जोखिम और पर्दे के पीछे काम कर रहे अदृश्य दूरस्थ कर्मचारी।
मानव जैसी मशीनों की कल्पना प्राचीन मिथकों से जुड़ी रही है, लेकिन उन्हें व्यावहारिक उपभोक्ता उत्पाद के रूप में देखना अपेक्षाकृत नया विचार है। विश्वभर में 50 से अधिक कंपनियां ऐसे रोबोट विकसित कर रही हैं। हाल के वर्षों में बैटरी, मोटर और सेंसर जैसे हार्डवेयर में सुधार—विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की प्रगति—और उन्नत एआई प्रणालियों से इस दिशा में तेजी आई है।
बाधाएं फिर भी बनी हुई हैं। घर, अस्पताल या अन्य अनियंत्रित वातावरण में रोजमर्रा के काम करना अभी भी रोबोट के लिए कठिन है। वैक्यूम क्लीनर जैसे विशेष रोबोट तो आम हो गए हैं, परंतु मानव घरों का ढांचा रोबोट के अनुकूल नहीं है। कई सूक्ष्म कार्यों में विशेष मशीनें बेहतर परिणाम देती हैं।
रोबोट के प्रदर्शन को सुधारने के लिए वास्तविक दुनिया के विस्तृत आंकड़ों की आवश्यकता होगी, जो लोगों के घरों में काम करते समय एकत्र होंगे। इससे निजी जीवन से जुड़े संवेदनशील डेटा के संग्रहण का खतरा बढ़ता है और गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। इसके अलावा, तकनीकी उद्योग में बढ़ते दूरस्थ ऑनलाइन श्रम से सामाजिक-आर्थिक असमानता और कम वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों के शोषण जैसी चिंताएं भी जुड़ी हैं।
‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स’ के अनुसार, व्यापक रूप से स्वीकार्य और उपयोगी घरेलू मानवनुमा रोबोट आने में अभी लगभग 20 वर्ष लग सकते हैं। वहीं जापानी शोधकर्ता हिरोशी इशिगुरो दशकों से मानव-सदृश ‘जेमिनॉइड’ बना रहे हैं, जिनका उद्देश्य केवल सुविधा या मुनाफा नहीं बल्कि यह समझना है कि मानव होने का मतलब क्या है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भाषा मॉडल और जेनरेटिव एआई के एकीकरण से ये रोबोट भविष्य में अधिक सक्षम होंगे। हालांकि उनकी कुशलता, स्वायत्तता और नेविगेशन में सुधार के लिए वर्षों के अनुसंधान और निवेश की आवश्यकता होगी।
गोपनीयता से जुड़े जोखिम इस तकनीक के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़े प्रतीत होते हैं। अत्यधिक उन्नत रोबोट घर में निजी जीवन का विस्तृत डेटा एकत्र कर सकते हैं, जिससे दुरुपयोग और डेटा उल्लंघन की आशंका बढ़ती है।
इन चुनौतियों के बावजूद मानवनुमा रोबोट वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रेरित करते रहेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें घर के काम सौंपने से पहले हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा माधव
माधव