एआई से वैश्विक वृद्धि 0.8 प्रतिशत बढ़ेगी, नौकरियों के लिए उच्च जोखिम भी मौजूद: आईएमएफ प्रमुख

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एआई से वैश्विक वृद्धि 0.8 प्रतिशत बढ़ेगी, नौकरियों के लिए उच्च जोखिम भी मौजूद: आईएमएफ प्रमुख

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 06:55 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 06:55 PM IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) वैश्विक आर्थिक वृद्धि को 0.8 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है और भारत के ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है।

हालांकि, जॉर्जीवा ने चेतावनी भी दी कि एआई से नौकरियां कम होने और वित्तीय स्थिरता पर जोखिम भी उत्पन्न हो सकते हैं।

जॉर्जीवा ने यहां आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में कहा कि वह एआई को लेकर आशावादी हैं, लेकिन इसके प्रभाव को अत्यधिक सकारात्मक दिखाने से सावधान रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि एआई को अच्छाई की ताकत या बुराई की ताकत के रूप में इस्तेमाल किए जाने के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

जॉर्जीवा ने कहा, ‘एआई वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लगभग एक प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है। हमारा अनुमान 0.8 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कोविड महामारी से पहले की तुलना में तेजी से बढ़ेगी। यह नए अवसर और अधिक रोजगार सृजित करने के लिए शानदार है। भारत के लिए भी यही प्रभाव दिख रहा है और इसका अर्थ है कि भारत का विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।’

उन्होंने कहा कि एआई उन देशों के लिए अधिक अवसर पैदा करता है जो डिजिटल बुनियादी ढांचा, कौशल विकास और एआई को तेजी से अपनाने में आगे हैं।

उन्होंने कहा कि देशों को जोखिमों के प्रति सचेत रहते हुए अवसरों को अपनाना चाहिए।

उन्होंने एआई से जुड़े तीन प्रमुख जोखिमों को गिनाते हुए कहा, ‘मैं एआई को लेकर बहुत आशावादी हूं। हालांकि मैं बहुत भोली भी नहीं हूं, इससे काफी जोखिम भी जुड़े हैं।’

जॉर्जीवा ने कहा कि सबसे पहले, एआई से कुछ देशों के पास प्रौद्योगिकी होने और कुछ देशों के पास न होने के कारण वैश्विक असमानता बढ़ने का खतरा है। दूसरा, यह वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, क्योंकि एआई अनियंत्रित होने पर वित्तीय बाजारों में संकट पैदा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, एआई आने से नौकरियों के जाने का भी खतरा है, और अभी तक ऐसी सोच नहीं बन पाई है कि लोग नई एआई अर्थव्यवस्था में अपनी जगह किस तरह बना सकेंगे।

जॉर्जीवा ने कहा, ‘हमने इस जोखिम को बहुत ऊपर आंका है। हम वास्तव में श्रम बाजार पर एआई के प्रभाव को एक ‘सुनामी’ की तरह देख रहे हैं। वैश्विक स्तर पर लगभग 40 प्रतिशत नौकरियां एआई से प्रभावित होंगी, कुछ में सुधार होगा और कुछ खत्म हो जाएंगी। उभरते बाजारों में 40 प्रतिशत प्रभावित होंगे, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत तक है। और यह बदलाव अपेक्षाकृत कम समय में ही होने जा रहा है।’

जॉर्जीवा ने कहा कि आईएमएफ देशों के साथ मिलकर यह समझने का काम जारी रखेगा कि एआई में क्या बदलाव हो रहे हैं और भविष्य की नीतियों के लिए इसे कैसे आकार दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘हमें एआई को देखने और समझने में लचीला रुख अपनाना होगा।’

आईएमएफ के एक अध्ययन के मुताबिक, एआई के कारण अमेरिकी श्रम बाजार पर असर पड़ रहा है। अमेरिका में हर दस में से एक नौकरी के लिए अब अतिरिक्त कौशल की जरूरत है और इस कौशल से लैस लोगों को बेहतर वेतन मिलता है।

जॉर्जीवा ने कहा, ‘जब लोगों के पास ज्यादा पैसे होंगे, तो वे स्थानीय सेवाओं पर खर्च करेंगे। वे रेस्तरां, मनोरंजन आदि में जाएंगे, जिससे कम-कौशल वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी। आश्चर्य की बात यह है कि एआई का रोजगार पर कुल मिलाकर प्रभाव सकारात्मक ही होने वाला है। एआई से एक नई नौकरी बनने पर कुल रोजगार में 1.3 नौकरियां बनती हैं। इसका मतलब है कि कुछ लोगों को ज्यादा अवसर मिलते हैं।’

हालांकि उन्होंने यह आशंका जताई कि एआई कम वेतन वाली प्रारंभिक स्तर की कुछ नौकरियों को समाप्त कर सकता है।

उन्होंने कहा, ‘सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि एआई की वजह से जो नौकरियां खत्म होती हैं, वे अक्सर शुरुआती स्तर की होती हैं। ये तय ढर्रे वाले काम होते हैं और इन्हें आसानी से स्वचालित किया जा सकता है। इसलिए यदि आप ऐसे काम में हैं, तो आपके लिए यह जोखिम पैदा कर सकता है।’

उन्होंने कहा कि एआई के आगे बढ़ने के साथ तालमेल बिठाने के लिए शिक्षा प्रणाली को नए ढंग से बदलने की जरूरत है। लोगों को केवल कुछ खास कौशल सीखने के बजाय यह सीखना चाहिए कि कैसे सीखना है।

इसके अलावा, श्रम बाजार में बड़े बदलाव के कारण कामगारों के लिए समर्थन और सामाजिक सुरक्षा भी जरूरी है, ताकि उनके काम करने का वातावरण सुरक्षित और अनुकूल बने।

आईएमएफ प्रमुख ने कहा, ‘दुनिया को यह ध्यान से देखना चाहिए कि क्या कारगर है और क्या नहीं। इसके अलावा चीजों को बेहतर दिखाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अगर हम ऐसा करेंगे, तो भूमंडलीकरण के समय जैसी स्थिति दोहराई जाएगी, जब लोग इसके खिलाफ हो गए थे। हालांकि भूमंडलीकरण से बहुत फायदे हुए, लेकिन कुछ समुदायों को बड़ा नुकसान हुआ और दुनिया ने समय रहते उनकी मदद नहीं की।’

उन्होंने बताया कि आईएमएफ इस बात का अवलोकन कर रहा है कि एआई को अपनाने के मामले में देश किस स्थिति में हैं, कुछ देशों में एआई कौशल की मांग आपूर्ति से ज्यादा है, कुछ देशों में आपूर्ति मांग से ज्यादा है, और कुछ देशों में न तो पर्याप्त मांग है और न ही पर्याप्त आपूर्ति।

जॉर्जीवा ने कहा कि एआई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी नैतिक आधारशिला है। उन्होंने कहा, ‘अब तक हमने एआई के तकनीकी पक्ष पर अधिक काम किया है। लेकिन एक मजबूत नैतिक आधार बनाने और ऐसे नियम बनाने पर कम ध्यान दिया है, जो नवाचार को रोके नहीं, बल्कि हमें सुरक्षित रखे।’

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम