थिम्पू, 31 जुलाई (भाषा) भारत और भूटान ने उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान भूटान में नयी दिल्ली के सहयोग से जारी विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
दोनों देशों ने 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सुविधा के समझौते पर हस्ताक्षर किए और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया।
भूटान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी और उनके भूटानी समकक्ष दाशो पेमा लेक्टुप दोर्जी की सह-अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की गई।
दूतावास ने कहा कि दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत के सहयोग से जारी परियोजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की।
उसने कहा कि भूटान ने देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत के महत्वपूर्ण सहयोग और योगदान की सराहना की।
विदेश मंत्रालय ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के लिए भारत की 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की प्रगति और कार्यान्वयन की समीक्षा की।
विज्ञप्ति के अनुसार कुल 332 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 नयी परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई जिनमें बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, कृषि, शहरी सुविधाएं और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसके साथ ही, 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत कुल 82 ‘पीटीए’ परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 6,860 करोड़ रुपये है।
दोनों विदेश सचिवों ने ‘थिम्पू में हरित बुनियादी ढांचा और खुले स्थान’ परियोजना के तहत विकसित थिम्पू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन भी किया। भारत ने द्विपक्षीय आर्थिक विकास सहयोग के तहत इन परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराया है।
दूतावास ने कहा कि भूटान में विकास पहल को समर्थन देने के लिए भारतीय निर्यात-आयात बैंक और भूटान के वित्त मंत्रालय के बीच 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सुविधा के समझौते का आदान-प्रदान किया गया।
उसने बताया कि दोनों पक्षों ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और भूटान के खेसर ग्यालपो आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के बीच स्वास्थ्य शिक्षा और अनुसंधान में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन का भी आदान-प्रदान किया।
भूटान की हरित परिवहन पहल के लिए भारत के सहयोग के तहत शाही सरकार को 45 इलेक्ट्रिक वाहन सौंपे गए।
मिसरी भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता की सह-अध्यक्षता करने के लिए 30-31 जुलाई को भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे और अन्य अधिकारियों से भी मुलाकात की।
भारत, भूटान का सबसे बड़ा विकास साझेदार है और वह कई दशकों से बुनियादी ढांचे, संपर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता देता रहा है।
भारत ने पड़ोसी हिमालयी देश भूटान के साथ अपनी दीर्घकालीन विकास साझेदारी के तहत उसकी 13वीं पंचवर्षीय योजना में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है।
भाषा अविनाश अविनाश पवनेश
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