भारत और चीन को अपने मतभेदों को उपयुक्त तरीके से सुलझाना चाहिए : चीनी विदेश मंत्रालय
भारत और चीन को अपने मतभेदों को उपयुक्त तरीके से सुलझाना चाहिए : चीनी विदेश मंत्रालय
(केजेएम वर्मा)
बीजिंग, 11 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा से पहले, चीन ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को उपयुक्त तरीके से सुलझाना चाहिए और अपने संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
राष्ट्रपति शी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शनिवार को नयी दिल्ली पहुंचेंगे। यह लगभग सात साल में भारत की उनकी पहली यात्रा होगी। शनिवार को शिखर सम्मेलन से इतर उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।
यह पूछे जाने पर कि चीन मोदी-शी की मुलाकात को किस नजरिए से देखता है, तो चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि कजान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा, जब दोनों नेताओं की मुलाकात होगी।
माओ ने कहा कि चीन, दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ काम करेगा। वह द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखेगा, संवाद और सहयोग मजबूत करेगा, ताकि मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाया जा सके। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की मदद करने वाले साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बारे में माओ ने कहा कि यह उभरते बाजारों और विकासशील देशों के लिए एकजुटता और सहयोग बनाए रखने का एक अहम मंच है।
उन्होंने कहा कि अपनी स्थापना के समय से ही ब्रिक्स देशों ने खुलेपन, सबको साथ लेकर चलने और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग की भावना को बनाए रखा है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बहुपक्षवाद, निष्पक्षता और न्याय को बनाए रखने और साझा विकास की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व करने वाली एक वास्तविक ताकत के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा कि चीन ब्रिक्स को बहुत महत्व देता है और इसके सहयोग में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं।
ईरान-अमेरिका टकराव और यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच हो रहे नयी दिल्ली शिखर सम्मेलन के महत्व पर माओ ने कहा कि चीन वार्ता और संवाद के जरिए विवादों को सुलझाने तथा शांति व स्थिरता में योगदान देने के लिए ब्रिक्स देशों के साथ काम करने को तैयार है।
इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर, भारत 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
शी ने पिछली बार 2019 में चेन्नई के पास मामल्लपुरम में मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश

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