भारत-चीन सीमा वार्ता में सीमांकन, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर

भारत-चीन सीमा वार्ता में सीमांकन, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर

भारत-चीन सीमा वार्ता में सीमांकन, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर
Modified Date: August 25, 2026 / 11:39 pm IST
Published Date: August 25, 2026 11:39 pm IST

बीजिंग, 25 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मंगलवार को हुई व्यापक वार्ता के दौरान दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने, सीमांकन की दिशा में आगे बढ़ने तथा सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी प्रयासों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की संभावित भारत यात्रा से कुछ सप्ताह पहले हुई है।

बैठक की शुरुआत में डोभाल ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल होने का सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।

बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में जारी सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निर्देशों और दृष्टिकोण के अनुरूप है।’’

दूतावास ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने, स्थिरता बनाए रखने, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति सुनिश्चित करने, सीमांकन की दिशा में प्रगति करने और सीमा के दोनों ओर सहयोग से जुड़े जारी कार्यों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।’’

विशेष प्रतिनिधि स्तर की यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में एलएसी के पास चीनी सैनिकों की आक्रामक सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं।

डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे थे। उनकी यात्रा को 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हुए संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के जारी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।

डोभाल ने कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी है कि हम 25वें दौर की वार्ता के लिए यहां हैं। यह बातचीत खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जल्द होने वाला है।’’

उन्होंने रूस में 2024 में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पिछले साल चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और चिनफिंग की मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम अपने नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप बैठक कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने कजान और तियानजिन में हमारे संबंधों को स्पष्ट और सकारात्मक दिशा दी थी।’’

डोभाल ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंधों में जो सामान्य स्थिति देखने को मिली है, उसका सीधा कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।’’

डोभाल ने सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों के स्पष्ट संदर्भ में कहा, ‘‘आज हमने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के अपने प्रयासों को किस तरह और प्रभावी तथा मजबूत बनाया जा सकता है।’’

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है।

डोभाल ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल आयोजन और तीनों दर्रों के जरिये पारंपरिक सीमा व्यापार की बहाली से हमारे लोगों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को वास्तविक लाभ मिला है।’’

वांग ने कहा कि चीन और भारत के संबंध अब केवल द्विपक्षीय दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका वैश्विक और रणनीतिक महत्व भी है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए संवाद बढ़ाना, आपसी विश्वास मजबूत करना, बाधाएं दूर करना और मुश्किलों से पार पाना जरूरी है। हमें अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और ऐसे साझेदार बनना चाहिए जो एक-दूसरे की सफलता में योगदान दें।’’

वांग ने डोभाल के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति देने की भी बात कही।

उन्होंने कहा कि चीन और भारत को इतिहास से सीख लेनी चाहिए, द्विपक्षीय संबंधों में सीमा विवाद को उचित स्थान पर रखना चाहिए और बिना रुके, पीछे हटे या रास्ते से भटके आगे बढ़ते रहना चाहिए।

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, वांग ने भारत-चीन सीमा से जुड़े मामलों को लेकर धीरे-धीरे सकारात्मक विमर्श विकसित करने, संवाद, शांति, परामर्श और सहयोग को मुख्य आधार बनाने तथा द्विपक्षीय संबंधों के स्वस्थ एवं स्थिर विकास के लिए सकारात्मक परिस्थितियां तैयार करने पर जोर दिया।

वांग ने कहा, ‘‘मैं साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर आपके साथ गहन विचार-विमर्श जारी रखने को लेकर आशान्वित हूं, ताकि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें और सीमा विवाद को उचित तरीके से संभाल सकें। इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहेगी, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी नयी गति मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों पर दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों से नियमित संपर्क में हैं तथा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के मार्गदर्शन के अनुरूप काम कर रहे हैं।

वांग ने डोभाल के साथ अपनी बातचीत को ‘‘बहुत गहन और स्पष्ट’’ बताते हुए नयी सहमति बनने की उम्मीद जताई।

चीन के बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सीमांकन से जुड़ी बातचीत को आगे बढ़ाने, सीमा प्रबंधन एवं नियंत्रण को मजबूत करने, संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और सीमा-पार सहयोग को बढ़ावा देने पर गहन चर्चा की।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं। यह व्यवस्था 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए की गई थी।

विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की इस व्यवस्था से सीमा विवाद को हल करने में सफलता नहीं मिली है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर बार-बार उभरने वाले तनाव से निपटने के लिए इसे एक उपयोगी माध्यम मानते हैं।

वार्ता से पहले डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की।

भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि डोभाल और झेंग के बीच बातचीत में सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता मजबूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।

डोभाल के साथ मुलाकात के दौरान झेंग ने कहा कि चीन और भारत को अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना और संभालना चाहिए तथा दोनों देशों को अपने नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, झेंग ने कहा, ‘‘दोनों देशों को रणनीतिक आपसी विश्वास बढ़ाना, सहयोग की संभावनाओं का पूरा लाभ उठाना, बहुपक्षीय मंचों पर करीबी समन्वय बनाए रखना और मतभेदों को सही तरीके से सुलझाना चाहिए, ताकि चीन-भारत संबंधों के निरंतर और स्थिर विकास को बढ़ावा मिल सके।’’

पिछले साल अगस्त में चीन और भारत के बीच 24वें दौर की वार्ता हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने सीमा विवाद पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया था तथा कई मुद्दों पर साझा समझ विकसित की थी।

भाषा सिम्मी सुभाष

सुभाष


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