(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत को प्रशांत द्वीप समूह फोरम (पीआईएफ) में ‘‘रणनीतिक साझेदार श्रेणी’’ में शामिल किया गया है और उन्होंने इसे ‘‘सकारात्मक घटनाक्रम’’ बताते हुए कहा कि इससे इस क्षेत्र के साथ भारत के सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
जयशंकर ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में भारत-एफआईपीआईसी (फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन) विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की।
बैठक में जयशंकर ने कहा कि उन्हें प्रशांत द्वीप समूह फोरम (पीआईएफ) के महासचिव बैरन वाका का पत्र प्राप्त कर खुशी हुई, जिसमें उन्हें बताया गया है कि ‘‘भारत को पीआईएफ में रणनीतिक साझेदार श्रेणी में शामिल किया गया है। यह एक सकारात्मक घटनाक्रम है और मुझे विश्वास है कि इससे हमारे सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।’’
वर्ष 1971 में स्थापित पैसिफिक आइलैंड्स फोरम में 18 सदस्य हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कुक आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, फिजी, फ्रेंच पोलिनेशिया, किरिबाती, नाउरू, न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नियू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, मार्शल आइलैंड्स गणराज्य, समोआ, सोलोमन आइलैंड्स, टोंगा, तुवालु और वानुआतु शामिल हैं।
बैठक में जयशंकर ने नेताओं के साथ 2023 में आयोजित तीसरे एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति पर चर्चा की। इसमें फोरम के ढांचे के तहत विकास साझेदारी के साथ-साथ भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के तहत हुई प्रगति शामिल थी।
उन्होंने कहा कि दोनों ढांचों के तहत कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह रेखांकित करना चाहता हूं कि भारत ब्लू पैसिफिक महाद्वीप के लिए 2050 की रणनीति का पूरी तरह सम्मान और समर्थन करता है।’’ उन्होंने उस रूपरेखा का जिक्र किया, जो एक क्षेत्र के रूप में तथा प्रशांत क्षेत्र के देशों और क्षेत्रों, समुदायों और लोगों के रूप में मिलकर काम करने के लिए प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को निर्धारित करती है।
जयशंकर ने फिजी में 100 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।
भारत को 12 सदस्य देशों से 20 समुद्री एंबुलेंस की मांग मिली है। जयशंकर ने विश्वास जताया कि ‘‘मार्च 2027 तक हम इन्हें उपलब्ध कराने की स्थिति में होंगे।’’
फिजी में अगले महीने कृत्रिम अंग लगाने के लिए एक शिविर आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है। इससे जरूरतमंद करीब 650 मरीजों को लाभ मिलेगा।
भारत ने 14 प्रशांत द्वीपीय देशों में 2,800 घरों में सौर ऊर्जा की सुविधा उपलब्ध कराने का काम पूरा कर लिया है और 70 महिला सौर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया है।
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण लगातार मांग-आधारित, विकास-केंद्रित और जन-केंद्रित रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में भारत की विकास परियोजनाएं आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के हमारे साझा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।’’
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित कार्ययोजना के संबंध में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
अल नीनो के प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करने का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत इस प्राकृतिक घटना के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद करने के लिए तैयार है।
उन्होंने अंतरिक्ष, टिकाऊ तटीय और महासागरीय अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
भारत ने सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इन दोनों पहलों के तहत कई परियोजनाएं पहले से जारी हैं।
भाषा गोला संतोष
संतोष