(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (भाषा) भारत और अमेरिका ने रूस तथा ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर लगाए जा सकने वाले ‘‘प्रतिबंधों’’ पर चर्चा की और इस दौरान अमेरिका ने कहा कि वह क्षेत्रीय साझेदारों की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए तैयार है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘रुबियो और जयशंकर ने पश्चिम एशिया और उससे आगे के घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों ने उन देशों पर लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों पर भी चर्चा की, जो रूस और ईरान के साथ आर्थिक रूप से जुड़े हैं।’’
रूबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों को उनकी ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए बेहतर स्थिति में है।
दोनों राजनयिकों ने सुरक्षित, संरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि की।
बैठक में जयशंकर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए गए रूस प्रतिबंध कानून को लेकर भारत के ‘‘हितों और चिंताओं’’ को दोहराया तथा अमेरिका के साथ खाड़ी और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलकर अच्छा लगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून (एसआरआईए) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। खाड़ी और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।’’
इससे पहले रुबियो ने कहा था कि न्यूयॉर्क में जयशंकर से मिलकर ‘‘बहुत अच्छा लगा।’’
रुबियो ने कहा, ‘‘हम साथ मिलकर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं और प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर समन्वय कर रहे हैं।’’
पिछले शुक्रवार को ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून, 2026’ पर हस्ताक्षर किए। यह कानून रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, शुल्कों और प्रतिबंधात्मक प्रावधानों को अधिकृत तथा विस्तारित करता है और ईरान पर लागू मौजूदा प्रतिबंधों को जारी रखता है।
इस कानून का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने वाले प्रतिबंध विधेयक का प्रस्ताव दिया था।
संयुक्त राष्ट्र में मंगलवार को विश्व के नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ‘‘शक्तिशाली नए कानून’’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उन्हें रूस के तेल के बड़े खरीदारों पर ‘‘अत्यधिक नए शुल्क लगाने के अधिकार’’ प्रदान करता है। इन देशों में भारत और चीन शामिल हैं।
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस में कहा, ‘‘यदि जरूरी हुआ तो मुझे इनका इस्तेमाल करना पड़ेगा। अब हत्या रोकने का समय आ गया है।’’
भारत ने कहा है कि वह अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए वह विविध स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति जारी रखेगा।
भाषा रंजन गोला
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