भारत वाणिज्यिक पोतों में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की आईएईए की पहल में शामिल

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भारत वाणिज्यिक पोतों में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की आईएईए की पहल में शामिल

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 12:01 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 12:01 PM IST

वाशिंगटन, 27 अगस्त (भाषा) भारत समुद्री क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने वाली वैश्विक पहल में बुधवार को शामिल हो गया जिसके तहत तैरते परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण और असैन्य पोतों को परमाणु ऊर्जा से चलाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने यहां आयोजित एक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में ‘एटॉमिक टेक्नोलॉजीज लाइसेंस्ड फॉर एप्लीकेशंस एट सी’ (एटलस) पहल की शुरुआत की। सम्मेलन में भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजित कुमार मोहंती ने भाग लिया।

आईएईए महानिदेशक मारियानो ग्रॉसी ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा, ‘‘परमाणु और समुद्री क्षेत्रों को एक साथ लाकर हम ऊर्जा और पोत परिवहन जैसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों के भविष्य को आकार देने और समुद्र में परमाणु प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण इस्तेमाल को लेकर वैश्विक विश्वास कायम करने का अवसर पा रहे हैं।’’

एटलस पहल के तहत वाणिज्यिक पोतों के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने का लक्ष्य है। इससे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत के बिना अधिक गति वाले समुद्री परिवहन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

आईएईए ने कहा कि इसी तरह तैरते परमाणु ऊर्जा संयंत्रों जैसी तकनीकी नवोन्मेष से ऐसे बहुमुखी ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हो सकते हैं, जो तटीय या दूरदराज के समुदायों और उद्योगों को भरोसेमंद बिजली मुहैया करा सकें।

मोहंती ने कहा कि एटलस मंच की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब असैन्य समुद्री प्रणोदन और अपतटीय ऊर्जा के लिए परमाणु प्रौद्योगिकियों, खासकर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ इस्तेमाल को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत की लंबी तटरेखा, बड़ी संख्या में अपतटीय द्वीप और तेजी से विस्तार करता वाणिज्यिक पोत परिवहन क्षेत्र अपतटीय ऊर्जा आपूर्ति और संभावित रूप से असैन्य पोतों के प्रणोदन में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं।’’

मोहंती ने कहा कि एटलस भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों को समर्थन देने वाली भरोसेमंद और कम-कार्बन वाली बिजली उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि एटलस की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव हो रहा है। भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने और 2033 तक स्वदेश में डिजाइन किए गए कम से कम पांच ‘भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर’ तैनात करने के लक्ष्य वाले परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की है।

मोहंती ने कहा कि भारत ने हाल में ‘‘परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम’’ लागू किया है, जिसके तहत पहली बार परमाणु बिजली उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खोला गया है।

उन्होंने कहा कि नया कानून घरेलू दायित्व ढांचे को वैश्विक दायित्व व्यवस्था के अनुरूप करता है और भारत के स्वतंत्र परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की स्थिति तथा अधिकारों को और मजबूत करता है।

मोहंती ने कहा, ‘‘एक अग्रणी परमाणु शक्ति के रूप में, जिसके पास क्षमताएं हैं, भारत एटलस पहल को आगे बढ़ाने में स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास, ईंधन चक्रों, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और क्षमता निर्माण में अपनी विशेषज्ञता एवं अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।’’

भाषा मनीषा वैभव

वैभव