(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, एक जनवरी (भाषा) पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत पश्चिमी नदियों के पानी के अपने सीमित हिस्से का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है।
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत की मंजूरी से संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए साप्ताहिक प्रेस वार्ता में ये टिप्पणियां कीं।
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक उपाय लागू किये थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को ‘‘स्थगित’’ करना भी शामिल था।
विश्व बैंक की मध्यस्थता से गठित आईडब्ल्यूटी 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है।
अंद्राबी ने कहा, ‘‘हमने चिनाब नदी पर दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना के निर्माण की भारतीय योजनाओं से संबंधित खबरें देखी हैं। जाहिर है, ये खबरें गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं क्योंकि इस परियोजना के संबंध में पाकिस्तान के साथ कोई पूर्व सूचना साझा नहीं की गई थी।’’
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत से उन परियोजनाओं के बारे में जानकारी मांगी थी जिन्हें वह शुरू करने की योजना बना रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सिंधु जल के लिए पाकिस्तानी आयुक्त ने भारत में अपने समकक्ष से बताई गई परियोजनाओं की प्रकृति, दायरे और तकनीकी विवरणों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है, और वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या यह एक नयी परियोजना है, या किसी मौजूदा संयंत्र में कोई परिवर्तन या अतिरिक्त कार्य है।’’
प्रवक्ता ने कहा कि आईडब्ल्यूटी के तहत, भारत पश्चिमी नदियों पर एकतरफा रूप से किसी भी जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए अपने ‘‘सीमित हिस्से’’का दुरुपयोग नहीं कर सकता है।
अंद्राबी ने दोहराया कि आईडब्ल्यूटी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह ‘‘अपने मूलभूत जल अधिकारों को लेकर कभी समझौता नहीं करेगा’’।
भाषा देवेंद्र पवनेश
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