ढाका, एक जनवरी (भाषा) भारत और बांग्लादेश ने 30 साल के लिए की गई पुरानी गंगा जल बंटवारा संधि के अपने अंतिम वर्ष में प्रवेश करने के साथ बृहस्पतिवार को पद्मा और गंगा नदियों पर संयुक्त जल मापन की प्रक्रिया शुरू की।
बांग्लादेश की राजधानी से प्रकाशित अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ ने जल विज्ञान अधिकारियों के हवाले से बताया कि पद्मा नदी पर हार्डिंग ब्रिज से 3,500 फीट ऊपर की ओर और भारत में गंगा नदी पर फरक्का बिंदु पर जल मापन शुरू किया गया था।
खबर के मुताबिक, भारत के केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के उप निदेशक सौरभ कुमार और आयोग के सहायक निदेशक सनी अरोड़ा के नेतृत्व में दो सदस्यीय भारतीय टीम बांग्लादेश पहुंच चुकी है, जबकि बांग्लादेश जल विकास बोर्ड के उत्तर-पूर्वी मापन जल विज्ञान प्रभाग के कार्यकारी अभियंता अरिफिन जुबैद के नेतृत्व में चार सदस्यीय बांग्लादेशी टीम संयुक्त मापन के लिए भारत गई है।
ढाका से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित पाबना के जल विज्ञान विभाग के कार्यकारी अभियंता शिब्बर हुसैन ने कहा, ‘‘मौजूदा हालात को देखते हुए हम टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। जल संसाधन मंत्रालय ने पहले ही गृह मंत्रालय को पत्र भेजा था और भारतीय टीम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।’’
संधि में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, दोनों देश एक जनवरी से 31 मई तक गंगा और पद्मा नदियों में विभिन्न निर्दिष्ट बिंदुओं पर जलस्तर का मापन करेंगे और प्रत्येक 10 दिन का आंकड़ा रिकॉर्ड करेंगे।
भारत और बांग्लादेश ने 1996 में 30 साल के लिए गंगा जल बंटवारा समझौता किया था जिसकी मियाद दिसंबर 2026 में समाप्त होगी। दोनों देशों ने इसके नवीनीकरण के लिए पहले ही चर्चा शुरू कर दी है।
भाषा धीरज शफीक
शफीक