ओस्लो, 19 मई (भाषा) भारत ने तीन दिन में दूसरी बार, मानवाधिकार हनन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए न्याय, स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने संवैधानिक मूल्यों को रेखांकित किया है।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने नॉर्वे की पत्रकार हेली लेंग स्वेन्डसेन के एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। हेली ने पूछा था कि भारत के कथित मानवाधिकार हनन के बावजूद उस पर भरोसा क्यों किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ राजनयिक सोमवार रात संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जिसमें उन्होंने मीडिया को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता की जानकारी दी।
इससे पहले, हेली ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने की असफल कोशिश की, जब मोदी और स्टोर ने अपने प्रेस वक्तव्य दिये थे। मीडिया को पहले ही बता दिया गया था कि दोनों नेता सवालों के जवाब नहीं देंगे।
इसके बाद, नॉर्वे स्थित भारतीय दूतावास ने इस मुद्दे पर हेली के सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि दूतावास द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उनका ‘‘स्वागत है और वह अपने सवाल पूछ सकती हैं।’’
इसने कहा कि दूतावास आज रात 9:30 बजे रेडिसन ब्लू प्लाज़ा होटल में, प्रधानमंत्री की यात्रा पर संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। आप सभी का स्वागत है और आप वहां आकर अपने सवाल पूछ सकती हैं।
शनिवार शाम को हेग में दो डच पत्रकारों ने जॉर्ज से भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कथित तौर पर कम होने के बारे में इसी तरह के प्रश्न पूछे थे।
नीदरलैंड और स्वीडन की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ओस्लो पहुंचे थे।
हेली के प्रश्न का उत्तर देते हुए जॉर्ज ने विस्तार से बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर इतने सारे देशों का विश्वसनीय साझेदार क्यों रहा है और नयी दिल्ली द्वारा जी20 शिखर सम्मेलन, ‘वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन’ और हाल में आयोजित एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी का उदाहरण दिया।
राजनयिक ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा 100 से अधिक देशों को टीके भेजने का भी उल्लेख किया और तर्क दिया कि गंभीर चुनौतियों से निपटने में भारत के योगदान के कारण वैश्विक स्तर पर भारत पर भरोसा किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की एक सभ्यता है, जिसने दुनिया को कुछ अनूठा दिया है और देना जारी रखेगा।’’
जॉर्ज ने कहा कि भारत का संविधान एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य की गारंटी देता है तथा मौलिक अधिकारों और सिद्धांतों के जरिये न्याय के अलावा विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता के साथ-साथ अवसर की समानता सुनिश्चित करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम विश्व की कुल जनसंख्या का छठा हिस्सा हैं, लेकिन विश्व की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को भारत के विशाल आकार का अंदाजा नहीं है। वे कुछ अज्ञानी और नासमझ गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्रकाशित एक-दो रिपोर्ट पढ़ते हैं और फिर आकर सवाल पूछते हैं। हमें लोकतंत्र होने पर गर्व है। हम सदियों से एक लोकतांत्रिक समाज हैं।’’
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश