भारत-सूरीनाम संबंध ‘पारिवारिक’ बंधन पर आधारित हैं : जयशंकर

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भारत-सूरीनाम संबंध ‘पारिवारिक’ बंधन पर आधारित हैं : जयशंकर

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  • Publish Date - May 6, 2026 / 12:15 PM IST,
    Updated On - May 6, 2026 / 12:15 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

परामारिबो, छह मई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत सूरीनाम को ‘‘दूर का साझेदार’’ नहीं बल्कि “परिवार” के रूप में देखता है। उन्होंने दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह टिप्पणी की।

बुधवार को सूरीनाम की यात्रा से पहले ‘टाइम्स ऑफ सूरीनाम’ अखबार में लिखे लेख में जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब ‘‘मजबूत और बहुआयामी साझेदारी’’ में बदल गए हैं, जिसमें बुनियादी ढांचा, व्यापार, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और सूरीनाम ने उच्चस्तरीय यात्राओं के जरिए सहयोग को और मजबूत किया है। इसमें 2023 में सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी की भारत यात्रा और उसी वर्ष भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सूरीनाम यात्रा शामिल है।

जयशंकर ने बताया कि ‘इंडियन लाइन ऑफ क्रेडिट’ (रियायती दरों पर ऋण) के जरिए सूरीनाम में कई परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिनमें परानाम औद्योगिक बंदरगाह शहर से राजधानी परामारिबो तक 161 किलो वॉट की विद्युत ट्रांसमिशन लाइन, जल पंपिंग स्टेशन, निर्माण उपकरण, बिजली ढांचे का उन्नयन और तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति व रखरखाव शामिल हैं।

उन्होंने लिखा कि भारत ने पिछले वर्ष सूरीनाम को खाद्य सुरक्षा में मदद के लिए एक करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के 425 मीट्रिक टन खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध कराए।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत समर्थित अनुदान परियोजनाओं में बाढ़ चेतावनी प्रणाली, एक स्टेडियम तथा शिक्षा, खेल और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं।

जयशंकर ने यह भी बताया कि वह भारतीय अनुदान से स्थापित ‘पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग इकाई’ के उद्घाटन में शामिल होंगे। उन्होंने लिखा, ‘‘यह स्थानीय किसानों को सशक्त बनाएगा और मूल्यवर्धित उद्योग के जरिए सूरीनाम की आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा।’’

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और सूरीनाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों पर समान दृष्टिकोण रखते हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सूरीनाम, भारत समर्थित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ जैसी पहलों में भागीदार है।

जयशंकर ने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देश साझा इतिहास से जुड़े हुए हैं, जिसकी शुरुआत 1873 में ‘लल्ला रूख’ जहाज के जरिए भारतीयों के सूरीनाम पहुंचने से हुई थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय मूल का समुदाय सूरीनाम के समाज का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जिसने सरनामी हिंदुस्तानी भाषा, बैठक संगीत और दिवाली व फगवा जैसे त्योहारों की परंपरा को भी संजोए रखा है।

उन्होंने लिखा, ‘‘सूरीनाम ने वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’’

जयशंकर ने बताया कि 2003 में परामारिबो में विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत, सूरीनाम को किसी दूर के साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के रूप में देखता है।’’

भाषा गोला वैभव

वैभव