संयुक्त राष्ट्र, 24 जुलाई (भाषा) भारत ने कहा है कि वह वैश्विक आईसीटी सुरक्षा के मकसद से शुरू किए गए संयुक्त राष्ट्र के एक पोर्टल को धन उपलब्ध कराएगा। यह पोर्टल विकसित और विकासशील देशों के बीच क्षमता के अंतर को कम करेगा।
भारत ने यह भी कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी का पूरा फायदा तभी मिल सकता है जब उभरते खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा क्षमता मौजूद हो।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए सूचना एवं संचार टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर और जरूरत के हिसाब से क्षमता निर्माण करना तब मुमकिन और असरदार होता है, जब इसके लिए लगातार राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए।
वह बृहस्पतिवार को ‘अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में आईसीटी पर वैश्विक प्रणाली’ के पूर्ण सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने साइबर क्षमता निर्माण पर एक समर्पित विषयगत समूह बनाए जाने का भी स्वागत किया।
संयुक्त राष्ट्र के लिए स्थायी साइबर प्रणाली की पहली मुख्य पूर्ण बैठक 20-24 जुलाई के बीच हुई। इसमें सदस्य देशों ने वैश्विक साइबर क्षमता निर्माण प्रणाली के लिए योजना को आगे बढ़ाया और फंडिंग, कार्यान्वयन और महिलाओं के लिए फेलोशिप जैसे विषयों पर चर्चा की।
पर्वथनेनी ने कहा, ‘‘मेरे प्रतिनिधिमंडल को यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि ‘समर्पित ग्लोबल आईसीटी सुरक्षा सहयोग और क्षमता निर्माण पोर्टल’ का प्रस्ताव मूल रूप से भारत की पहल थी, जिसे पहली बार 2022 में पेश किया गया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें आज यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि कई वर्षों के विचार-विमर्श, आम सहमति और अंततः इसे अपनाए जाने के बाद, भारत इस पोर्टल को संयुक्त राष्ट्र के पोर्टल के रूप में संचालित करने के लिए पूरी राशि देगा, ताकि वर्षों की चर्चा के बाद आखिरकार ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जा सकें।’’
उन्होंने कहा कि भारत का सहयोग पोर्टल को तकनीकी रूप से तैयार करने और उसके रखरखाव में मदद करेगा।
उन्होंने घोषणा की कि ‘सीईआरटी-इन’ पोर्टल के परीक्षण और अवसंरचना संबंधी विकास के लिए जरूरी तकनीकी सलाह का काम संभालेगा। ‘सीईआरटी-इन’ भारत की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो कंप्यूटर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं के होने पर उनपर कार्रवाई करती है।
भाषा संतोष सुरेश
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