भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की धारणा ‘दीवारें खड़ी करने के बजाय पुल बनाने’ का आह्वान करती है: मुर्मू

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भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की धारणा ‘दीवारें खड़ी करने के बजाय पुल बनाने’ का आह्वान करती है: मुर्मू

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 10:27 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 10:27 PM IST

अश्विनी श्रीवास्तव

स्कोप्ये (उत्तरी मैसेडोनिया) 21 जुलाई (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि भारत की प्राचीन विचारधारा “वसुधैव कुटुम्बकम” “दीवारें खड़ी करने के बजाय पुल बनाने” का आह्वान करती है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक परिदृश्य संघर्षों और आर्थिक विभाजन से प्रभावित है।

मुर्मू ने ये बातें उत्तरी मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करते हुए कहीं। वह इस यूरोपीय देश की ऐतिहासिक दो-दिवसीय यात्रा पर हैं, जो किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की उत्तरी मैसेडोनिया की पहली यात्रा है।

मुर्मू ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कोई भी देश अकेले रहकर समृद्धि हासिल नहीं कर सकता।

मुर्मू ने कहा, ‘‘भारत की प्राचीन सभ्यतागत विचारधारा उस प्राचीन सूत्र —वसुधैव कुटुम्बकम— पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। जब वैश्विक परिदृश्य संघर्षों और आर्थिक विभाजन से बिखरा हुआ है, तब यह विचारधारा दीवारें खड़ी करने के बजाय पुल बनाने का आह्वान करती है।’’

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह साझा आस्था का वह आधार है, जो भारत और उत्तरी मैसेडोनिया को एकजुट करता है।

मुर्मू ने कहा कि दोनों देशों की संसदें लोगों की स्वतंत्रता की संरक्षक, उनके कानूनों की निर्माता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतिबिंब हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, “आज जब मैं इस सदन की ओर देखती हूं, तो मुझे यह एहसास होता है कि किसी राष्ट्र की वास्तविक धड़कन उसकी संसद में सुनाई देती है। लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं है; यह साझा आस्था का वह आधार है, जो भारत और उत्तरी मैसेडोनिया को जोड़ता है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संसद 140 करोड़ से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है और असाधारण विविधता वाले देश को लोकतांत्रिक आवाज प्रदान करती है।

उन्होंने कहा, “हमारे संविधान द्वारा मार्गदर्शित संसद इस सिद्धांत को साकार करती है कि भारत की विविधता लोकतंत्र के लिए कोई बाधा नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लोकतांत्रिक अनुभव केवल अपने संवैधानिक आधार के कारण ही उल्लेखनीय नहीं है, बल्कि अपने असाधारण विस्तार और पैमाने के कारण भी विशेष है। उन्होंने इसके उदाहरण के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुए आम चुनावों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि लगभग एक अरब मतदाताओं वाले भारत के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास हैं।

मुर्मू ने कहा, “इतनी विशाल भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बीच चुनावों का सफल संचालन भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया में हमारे लोगों के विश्वास का प्रमाण है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत उत्तरी मैसेडोनिया गणराज्य को किसी दूरस्थ देश के रूप में नहीं, बल्कि एक स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य की संरचना में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है।

उन्होंने कहा, “हमारे संबंध दो हजार वर्ष से भी अधिक समय पहले शुरू हुए थे। इस क्षेत्र के योद्धाओं और व्यापारियों के ऐतिहासिक अभियानों ने व्यापार, दर्शन और कला के लिए महत्वपूर्ण मार्ग खोले, जिससे हमारी प्रारंभिक सभ्यताएं एक-दूसरे से जुड़ीं।”

मुर्मू ने कहा कि उत्तरी मैसेडोनिया की समृद्ध परंपराएं भारत की बहुलतावादी भावना से गहराई से जुड़ती हैं।

उन्होंने कहा, “चाहे योग की सार्वभौमिक भाषा हो, सिनेमा के प्रति साझा प्रेम हो या शैक्षणिक आदान-प्रदान, हमारे लोग एक-दूसरे को प्राचीन और जीवंत संस्कृतियों के संरक्षक के रूप में पहचानते हैं।”

संसद सदस्यों के बीच संवाद से राजनीतिक उतार-चढ़ाव से परे टिकने वाला संस्थागत विश्वास मजबूत होता है, इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने सुझाव दिया, “आइए, हमारे युवा सांसदों को नयी दिल्ली और स्कोप्जे के बीच यात्रा करने दें। उन्हें एक-दूसरे से मिलने दें और संसदीय कार्यप्रणाली तथा सार्वजनिक नीति निर्माण के क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करने दें।”

सदन में मौजूद महिला सांसदों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने भारत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, विशेष रूप से भारत की पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका का जिक्र किया, जहां एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

उन्होंने कहा, “इसके परिणामस्वरूप लाखों महिलाएं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदार बन गई हैं। हमने हाल ही में एक ऐतिहासिक कानून भी बनाया है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करेगा। यह अधिक प्रतिनिधित्व वाली और समावेशी लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति केंद्रों में बदलाव हो रहा है।

उन्होंने कहा, “इस नए दौर में भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को हाशिये के क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विकास और नवाचार के एक गतिशील केंद्र के रूप में देखता है। उत्तरी मैसेडोनिया इस बदलाव के महत्वपूर्ण केंद्र पर स्थित है।”

उन्होंने कहा, “आपका देश भूमध्य सागर को मध्य यूरोप और पूर्व को पश्चिम से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। हम द्विपक्षीय स्तर पर और व्यापक क्षेत्र में भी अपने सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें उभरते व्यापार और निवेश के अवसर भी शामिल हैं।”

मुर्मू की उत्तरी मैसेडोनिया यात्रा मंगलवार को शुरू हुई, जो मोल्दोवा की उनकी यात्रा के समापन के बाद हुई। मोल्दोवा की यात्रा किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी।

उन्होंने कहा, “आइए, हम तत्काल भविष्य की सीमाओं से आगे देखें। आइए, अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ठोस आर्थिक उपलब्धियों में बदलें। इतिहास से जुड़े और भविष्य के लिए एक दृष्टि से प्रेरित, दो लोकतांत्रिक देशों के रूप में आइए, हम मिलकर ऐसा मार्ग तय करें जो हमारे लोगों के लिए शांति और समृद्धि लेकर आए।”

भाषा रंजन सुरेश

सुरेश