रुक-रुक कर उपवास करना वजन घटाने के लिए अधिक प्रभावी नहीं

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रुक-रुक कर उपवास करना वजन घटाने के लिए अधिक प्रभावी नहीं

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 11:37 AM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 11:37 AM IST

( एवलिन पार, आस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी )

सिडनी, 17 फरवरी (द कन्वरसेशन) पोषण की जब बात होती है तो इन दिनों रुक-रुक कर उपवास करना लोकप्रिय होता जा रहा है लेकिन इस ‘‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’’ यानी रुक-रुक कर उपवास को लेकर नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में कहा गया है कि यह वजन घटाने के मामले में पारंपरिक आहार सलाह से अधिक प्रभावी नहीं है।

यह निष्कर्ष ‘‘कोक्रेन कोलाबोरेशन’’ द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है।

इस समीक्षा में 2016 से 2024 के बीच उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में प्रकाशित 22 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया।

ये अध्ययन 1,995 वयस्कों पर किये गये। सभी प्रतिभागी अधिक वजन वाले थे। इन अध्ययनों में छह से 12 महीने तक, रुक-रुक कर किए जाने वाले उपवास के प्रभाव को परखा गया।

अध्ययन में अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों के परिणामों की तुलना की गई। प्रतिभागियों को या तो मानक आहार संबंधी सलाह (जैसे कैलोरी कम करना या विशेष खाद्य समूहों का सेवन) दी गई, या उन्होंने अंतराल उपवास अपनाया, या फिर उनके मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया/प्रतीक्षा सूची में रखा गया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि ऊर्जा-सीमित आहार अपनाने वाले और रुक-रुक कर उपवास करने वाले लोगों में वजन घटाने का स्तर लगभग समान रहा। 21 अध्ययनों (1,713 प्रतिभागियों) के विश्लेषण में दोनों समूहों में 10 प्रतिशत वजन घटने से लेकर एक प्रतिशत वजन बढ़ने तक के परिणाम दर्ज किए गए। आहार संबंधी सलाह में कैलोरी कम करना, फल-सब्जियां और साबुत अनाज पर आधारित भोजन या अन्य आहार योजनाएं शामिल थीं।

छह अध्ययनों (448 प्रतिभागियों) में रुक-रुक कर किए जाने वाले उपवास की तुलना ‘कोई हस्तक्षेप नहीं’ समूह से की गई। अंतराल उपवास समूह में औसतन प्रतिभागियों का लगभग 5 प्रतिशत वजन घटा, जबकि नियंत्रण समूह में लगभग 2 प्रतिशत वजन की कमी देखी गई।

शोध मानकों के अनुसार 3 प्रतिशत का अंतर चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए लेखकों ने निष्कर्ष निकाला कि रुक-रुक कर किया जाने वाला उपवास वजन घटाने में ‘कुछ भी न करने’ से खास बेहतर साबित नहीं हुआ।

समीक्षा में जीवन-गुणवत्ता पर भी अंतराल वाले उपवास के असर का आकलन किया गया, लेकिन उपलब्ध सीमित अध्ययनों के आधार पर इसका प्रभाव बहुत कम पाया गया।

रुक-रुक कर किया जाने वाला उपवास वजन प्रबंधन की एक रणनीति है। यह उपवास एक ऐसी आहार पद्धति है, जिसमें कुछ निश्चित घंटों या दिनों में भोजन करने और उपवास (व्रत) रखने का एक क्रम चलता है। यह वजन घटाने और मेटाबोलिज्म को सुधारने के लिए बहुत लोकप्रिय है। इसमें क्या खाना है, इसके बजाय कब खाना है, इस पर ध्यान दिया जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि उपलब्ध अध्ययनों की संख्या और गुणवत्ता सीमित है। ‘कोई हस्तक्षेप नहीं’ तुलना वाले केवल छह अध्ययन थे और उनमें भी तरीकों में विविधता थी। साथ ही, समीक्षा केवल 12 महीने तक की अवधि के अध्ययनों पर आधारित थी। दीर्घकालिक प्रभावों, विशेषकर वजन बनाए रखने में इसकी भूमिका, पर और शोध की जरूरत बताई गई है।

हालांकि कुछ अध्ययनों में अंतराल उपवास से रक्तचाप में कमी, मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम में कमी और चयापचय सुधार जैसे संभावित लाभों के संकेत मिले हैं।

समीक्षा का निष्कर्ष है कि अंतराल उपवास कुछ लोगों के लिए व्यवहारिक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे पारंपरिक आहार से बेहतर मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

वर्तमान साक्ष्यों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अंतराल उपवास अपना रहा है या अपनाने पर विचार कर रहा है, तो यह वजन प्रबंधन का सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। हालांकि, किसी भी वजन घटाने की रणनीति के सफल होने के लिए उसका व्यक्तिगत पसंद और जीवनशैली के अनुरूप होना जरूरी है। किसी भी नए आहार की शुरुआत से पहले, विशेषकर यदि कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या हो, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित है।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव

वैभव