अमेरिका की नाकेबंदी के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया से ऊर्जा निर्यात रोकने की धमकी दी

Ads

अमेरिका की नाकेबंदी के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया से ऊर्जा निर्यात रोकने की धमकी दी

  •  
  • Publish Date - July 15, 2026 / 01:19 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 01:19 PM IST

दुबई, 15 जुलाई (एपी) अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहे पोतों पर ईरान के हमलों के बाद ईरानी बंदरगाहों पर बुधवार तड़के फिर से नाकेबंदी लगा दी।

इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले देशों पर फिर से हमले किए।

अमेरिका और ईरान दोनों उस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे युद्ध से पहले दुनिया में होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता था। अमेरिका और ईरान के हालिया हमलों के कारण क्षेत्र के फिर से पूर्ण युद्ध की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है।

अमेरिका ने पहली बार अप्रैल के मध्य में नाकेबंदी लागू की थी और जून के मध्य में इसे हटा लिया था। नाकेबंदी हटाने से एक दिन पहले एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था लेकिन जलडमरूमध्य को लेकर लड़ाई तेज होने के कारण यह बातचीत रुक गई है।

नाकेबंदी के जवाब में ईरान के अर्द्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने पश्चिम एशिया से होने वाला समूचा ऊर्जा निर्यात रोकने की बुधवार को धमकी दी।

उसने कहा, ‘‘क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या किसी के लिए नहीं।’’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को नाकेबंदी फिर से लागू करने की घोषणा करते समय कहा था कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पोतों पर 20 प्रतिशत शुल्क भी लगाएंगे लेकिन नाकेबंदी फिर शुरू किए जाने से कुछ घंटे पहले उन्होंने फारस की खाड़ी के सहयोगी देशों के अनुरोध का हवाला देते हुए शुल्क वसूलने की योजना छोड़ दी।

‘यूएस सेंट्रल कमान’ ने बुधवार को कहा कि नाकेबंदी फिर लागू करते हुए अमेरिका ने ईरान पर सात घंटे तक हमले किए और इस दौरान उसके दर्जनों स्थलों को निशाना बनाया गया।

बहरीन और कुवैत में बुधवार तड़के मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी की गई। दोनों देशों को ईरान की ओर से किए गए हमलों का सामना करना पड़ा। इस तरह के हमले लगभग रोज हो रहे हैं।

जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गईं तीन मिसाइलों को मार गिराया। ईरान ने इन तीनों देशों पर हमले करने की जिम्मेदारी ली है।

‘यूएस सेंट्रल कमान’ के प्रमुख नौसेना एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान में कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन दागे।

कूपर ने कहा, ‘‘अमेरिकी बल ईरान को अकारण की गई उसकी उस आक्रामक कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहरा रहे हैं जिससे निर्दोष लोगों का जीवन लगातार खतरे में पड़ रहा है।’’

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसके बाद ईरान ने पोतों पर हमले करके और उन्हें धमकियां देकर होर्मुज हलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया था। इससे तेल, उर्वरक और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि हुई।

ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे उन पोतों पर हाल में हमले किए जो ओमान के निकट अमेरिकी सेना की निगरानी वाले और तेहरान के नियंत्रण से बाहर के समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इन हमलों के बाद हिंसा का हालिया दौर शुरू हुआ।

अमेरिका ने बल प्रयोग करके जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कहीं अधिक बड़ा नौसैनिक बेड़ा और संभवतः दसियों हजार जमीनी सैनिकों की जरूरत होगी।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने उनके देश को निशाना बनाकर जारी अमेरिकी हमलों की आलोचना की।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख को लिखे पत्र में कहा, ‘‘अमेरिका हमलावर है, पीड़ित नहीं।’’

ट्रंप ने मंगलवार रात ‘फॉक्स न्यूज चैनल’ से कहा था कि अगले दो दिन में ईरान पर और अमेरिकी हमले किए जाएंगे।

ट्रंप ने कहा, ‘‘बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें, अन्यथा आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।’’

‘यूएस सेंट्रल कमान’ ने कहा कि उसने मंगलवार को ईरान के कई क्षेत्रों में हमले किए। ईरान ने इन हमलों की पुष्टि की, लेकिन इस दौरान हुए जान-माल के नुकसान का कोई समग्र आकलन नहीं दिया।

एपी सिम्मी नरेश

नरेश