(अदिति खन्ना)
लंदन, 26 जनवरी (भाषा) महाराजा चार्ल्स तृतीय ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे संदेश में भारत-ब्रिटेन की अटूट साझेदारी की सराहना की। वहीं, सोमवार को ध्वजारोहण समारोह के लिए भारतीय समुदाय के सदस्य ‘इंडिया हाउस’ में एकत्रित हुए।
महाराजा के राष्ट्रपति को लिखे पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है। इस पत्र में उन्होंने ‘राष्ट्रमंडल के लिए साझा मूल्यों और पारस्परिक सम्मान’ पर प्रकाश डाला।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई के प्रबल समर्थक चार्ल्स ने विशेष रूप से ‘स्वच्छ ऊर्जा पहल के माध्यम से स्थिरता, जलवायु वित्त पर सहयोग और स्वच्छ प्रौद्योगिकी और हरित विकास पर पहल’ के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों पर प्रकाश डाला।
महाराजा चार्ल्स और महारानी कैमिला के संदेश में कहा गया है, “राष्ट्रमंडल की समृद्ध विविधता और युवा पीढ़ी की ऊर्जा आशा और प्रगति को प्रेरित करती रहती है। वैश्विक अनिश्चितता के इस समय में, हमारी सामूहिक शक्ति और एकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।’
महाराजा की अध्यक्षता वाले 56 सदस्यीय संगठन के अन्य पहलुओं पर विचार करते हुए, संदेश में नवंबर में एंटीगुआ और बारबुडा में होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) में ‘भविष्य के लिए एक सामूहिक दृष्टिकोण’ की पुष्टि करने की बात कही गई है।
चार्ल्स ने राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी अहमदाबाद को मिलने पर भारत को बधाई दी।
संदेश में कहा गया है, ‘मैं आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी पहल के माध्यम से भारत के अंतरराष्ट्रीय जलवायु नेतृत्व की सराहना ही कर सकता हूं। भारत इस महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए एक सशक्त वैश्विक आवाज है, और हमारा सहयोग एक समृद्ध, सुरक्षित और टिकाऊ दुनिया को आकार देने के साझा संकल्प को रेखांकित करता है।’
इस बीच ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरैस्वामी ने यहां प्रवासी समुदाय की सभा में राष्ट्रपति मुर्मू के गणतंत्र दिवस के पारंपरिक संबोधन को पढ़ा।
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान की प्रस्तुति के बाद, ब्रिटेन स्थित बंगाल हेरिटेज फाउंडेशन के गायकों ने देशभक्ति गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष प्रस्तुति दी।
दोरैस्वामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘उच्चायोग में राष्ट्रीय दिवस मनाने के लिए समुदाय का यहां उपस्थित होना हमेशा ही खास होता है, और इस बार यह और भी खास इसलिए हो गया क्योंकि सभी ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस गाने में भाग लिया।’
उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ हमें गीत की याद दिलाने वाली प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय स्मृति में गीत के महत्व को भी दर्शाता था।’
भाषा नोमान नरेश
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