इंडोनेशिया में भूस्खलन में लापता हुए 42 व्यक्तियों में मरीन सैनिक भी शामिल

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इंडोनेशिया में भूस्खलन में लापता हुए 42 व्यक्तियों में मरीन सैनिक भी शामिल

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 10:21 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 10:21 PM IST

बांडुंग (इंडोनेशिया), 26 जनवरी (एपी) इंडोनेशिया के मरीन फोर्स के 19 सदस्य पश्चिम जावा प्रांत में शनिवार को हुए भूस्खलन में लापता हुए 42 लोगों में शामिल हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

मरीन सैनिक दुर्गम इलाकों में और भारी बारिश के बीच प्रशिक्षण ले रहे थे, जब उनका शिविर और पश्चिम जावा प्रांत के पासिर लांगू गांव में माउंट बुरंगरांग की ढलानों पर स्थित लगभग 34 मकान शनिवार तड़के हुए भूस्खलन की चपेट में आ गए। एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है, जिसमें शामिल कर्मियों की संख्या 500 से बढ़ाकर 2,100 कर दी गई है। ये कर्मी वाटर पंप, ड्रोन और खुदाई मशीनों का उपयोग कर रहे हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने कहा कि 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि मृतकों में चार मरीन सैनिक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वे 23 सदस्यीय एक टीम का हिस्सा थे, जो इंडोनेशिया–पापुआ न्यू गिनी सीमा पर प्रशिक्षण ले रही थी। उन्होंने कहा कि बाकी लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

अली ने कहा, ‘‘दो रात तक हुई भारी बारिश ने उस ढलान की मिट्टी को काफी गीला कर कर दिया था जिसने उनके प्रशिक्षण क्षेत्र को मलबे में दफन कर दिया। भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि वहां जाने वाली सड़क संकीर्ण है।’’

स्थानीय खोज और बचाव कार्यालय के प्रमुख एडे डायन पर्माना ने पत्रकारों से कहा कि 42 लोग लापता हैं।

राष्ट्रीय खोज और बचाव एजेंसी के अभियान निदेशक युधी ब्रामंत्यो ने कहा कि बचावकर्मी दो किलोमीटर तक फैले भूस्खलन के मलबे, पत्थर और उखड़े हुए पेड़ों को हटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर मलबे की परत 8 मीटर तक है।

ब्रामंत्यो ने कहा कि अधिकारियों ने रात के समय सीमित दृश्यता और अस्थिर मिट्टी के कारण बचाव कार्यों को रोक दिया, क्योंकि यह बचावकर्ताओं के लिए खतरनाक हो सकता था।

इंडोनेशिया 17,000 से अधिक द्वीपों का एक द्वीपसमूह है। इंडोनेशिया में अक्टूबर से अप्रैल के बीच मौसमी बारिश और ऊंची ज्वार-लहरों के कारण अक्सर बाढ़ और भूस्खलन होते हैं। यहां लाखों लोग पहाड़ी इलाकों या उपजाऊ बाढ़ वाले मैदानी क्षेत्रों के पास रहते हैं।

एपी अमित सुभाष

सुभाष