महावीर सिंघवी ने टोरंटो में भारत के महावाणिज्यदूत के रूप में कार्यभार संभाला

महावीर सिंघवी ने टोरंटो में भारत के महावाणिज्यदूत के रूप में कार्यभार संभाला

महावीर सिंघवी ने टोरंटो में भारत के महावाणिज्यदूत के रूप में कार्यभार संभाला
Modified Date: April 3, 2026 / 06:07 pm IST
Published Date: April 3, 2026 6:07 pm IST

ओटावा, तीन अप्रैल (भाषा) वरिष्ठ राजनयिक महावीर सिंघवी ने टोरंटो में भारत के नये महावाणिज्यदूत के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब नयी दिल्ली और ओटावा व्यापार, निवेश एवं ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक विस्तार देने की कोशिशों में जुटे हैं।

सिंघवी भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 1999 बैच के अधिकारी हैं। वह नयी भूमिका संभालने से पहले नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत थे।

टोरंटो स्थित भारतीय मिशन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “सिंघवी की नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुई है, जब भारत-कनाडा संबंधों को और मजबूत करने तथा उन्हें बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर खासतौर पर ध्यान दिया जा रहा है।”

पोस्ट के मुताबिक, सिंघवी आपसी विश्वास को मजबूत करने, द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने और साझा मूल्यों एवं अवसरों पर आधारित एक दूरदर्शी साझेदारी का निर्माण करने के लिए कनाडाई हितधारकों और जीवंत भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं।

एक राजनयिक के रूप में अपने लगभग 25 वर्षों के करियर में सिंघवी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं, जिनमें नई, उभरती और रणनीतिक प्रौद्योगिकी के साथ-साथ आतंकवाद-रोधी प्रभागों का नेतृत्व भी शामिल है।

सिंघवी ने भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र पहलुओं को मजबूत करने के लिए एक नये ढांचे को अंतिम रूप देने के एक महीने बाद पदभार ग्रहण किया है।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान स्वीकृत इस ढांचे में द्विपक्षीय वार्षिक व्यापार को वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य शामिल है।

भारत और कनाडा ने पिछले कुछ महीनों में आपसी संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

साल 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट का हाथ होने का आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था।

भारत ने ट्रूडो के आरोप को “बेतुका” बताकर खारिज कर दिया था।

अक्टूबर 2024 में भारत ने अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को निज्जर हत्याकांड से जोड़ने के कनाडा सरकार के प्रयासों के बाद वापस बुला लिया था।

भारत ने इतनी ही संख्या में कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित भी कर दिया था।

हालांकि, पिछले साल अप्रैल में कनाडा में संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता कार्नी की जीत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की पहल शुरू की गई।

दोनों देश एक-दूसरे की राजधानियों में अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति कर चुके हैं।

पिछले साल जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कनाडा के कनानास्किस द्वीप समूह गए थे।

सिंघवी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘टोरंटो में भारत के महावाणिज्यदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद मैं ‘जैन सोसाइटी ऑफ टोरंटो’ पहुंचा और वहां प्रार्थना की। मैंने अहिंसा, शांति, एकता और सद्भाव जैसे शाश्वत मूल्यों पर चिंतन भी किया।’’

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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