पेरिस, 18 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रपं की द्विपक्षीय बैठक के दौरान व्यापार के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा हुई थी और दोनों नेताओं ने अपने वार्ताकारों को प्रस्तावित व्यापार समझौते को यथाशीघ्र अंतिम रूप देने का निर्देश दिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मिसरी की ये टिप्पणियां मोदी और ट्रंप के बीच जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान 16 महीनों में पहली बार हुई आमने-सामने की हुई बातचीत के एक दिन बाद आईं। दोनों देशों के शासनाध्यक्षों की मुलाकात का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को फिर से बेहतर बनाना था।
विदेश सचिव ने कहा, ‘‘कल कुछ जरूरी और अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी, खासकर व्यापार समझौते पर, जिसने पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच कुछ हद तक अनिश्चितता पैदा कर दी है।’’
उन्होंने एक प्रेस वार्ता ने कहा, ‘‘और यह जरूरी था कि हम इन मुद्दों पर किसी तरह की निश्चितता की ओर बढ़ें।’’
मिसरी ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काफी प्रगति हुई है और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने अमेरिका के साथ एक अंतरिम मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में पहले ही काफी प्रगति कर ली है। हम इस समझौते को पूरा करने के अंतिम चरण में हैं।’’
मिसरी ने कहा, ‘‘एवियॉन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में यह चर्चा का एक मुख्य विषय था। दोनों नेताओं ने एक बार फिर इस समझौते को यथाशीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।’’
विदेश सचिव ने कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और यूरोपीय संघ के नेताओं एंतोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मोदी की अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार चर्चा के प्रमुख मुद्दों में एक था।
मिसरी ने कहा कि जी7 संपर्क बैठकों और द्विपक्षीय बातचीत के प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी प्रमुखता से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और सुरक्षा देखने की भारत की इच्छा व्यक्त की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर किए।
मिसरी ने कहा कि भारत इस संघर्ष में शामिल या इससे प्रभावित मुख्य पक्षों के लगातार संपर्क में रहा है।
उन्होंने कहा,‘‘हम उन सभी सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और आगे बढ़ने के लिए जो कुछ भी हमारे बस में होगा, वह हम करने को तैयार रहेंगे।’’
मिसरी ने कहा, ‘‘भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ के बाद हुए घटनाक्रम का स्वागत किया है और उम्मीद करता है कि इस क्षेत्र में जल्द ही शांति और स्थिरता लौटेगी।’’
विदेश सचिव ने कहा कि भारत ने हमेशा इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की आजादी और बिना किसी रुकावट के व्यापार बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि मोदी ने खास तौर पर नाविकों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है।
मिसरी ने कहा, ‘‘उन्होंने (मोदी ने)बताया कि कैसे लाखों भारतीय समुद्री कर्मचारी असल में समुद्री जहाजों पर काम करके दुनिया को एक बड़ी सेवा देते हैं और वैश्विक समुदाय और वैश्विक समुद्री व्यापार में अहम भूमिका निभाते हैं। इसीलिए, उनकी सुरक्षा वैश्विक समुदाय के लिए साझा चिंता का विषय होनी चाहिए।’’
विदेश सचिव ने कहा, ‘‘यह ऐसा मुद्दा है जिसे उन्होंने (मोदी ने)न केवल जी7 सम्मेलन संपर्क बैठकों में उठाया, बल्कि कई नेताओं के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठकों में भी उठाया।’’
मिसरी ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता आएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हमेशा इस तरह के विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की वकालत की है। हमने हमेशा हर संभव तरीके से योगदान देने की अपनी तत्परता भी ज़ाहिर की है।’’
मिसरी ने कहा, ‘‘इस क्षेत्र के सभी देशों के साथ हमारे बहुत मजबूत संबंध हैं।’’
भाषा धीरज माधव
माधव