बेरूत, पांच सितंबर (एपी) इजराइल और हिजबुल्ला के बीच संघर्षविराम लागू हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है और लेबनान के ज्यादातर हिस्सों में लड़ाई रुक गई है लेकिन दक्षिणी लेबनान की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एक पहाड़ी पर संघर्ष अब भी जारी है।
हाल के हफ्तों में अली ताहेर पहाड़ी पर इजराइली सेना लगभग रोज गोलाबारी और हवाई हमले कर रही है। ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्ला ने भी इलाके में इजराइली बलों पर कई बार ड्रोन से हमले किए हैं।
लेबनान और इजराइल के बीच वार्ता में मध्यस्थता कर रहा अमेरिका चाहता था कि हिजबुल्ला को निरस्त्र करने और उसके सैन्य ढांचे को खत्म करने की व्यापक योजना के तहत यह पहाड़ी लेबनानी सेना को सौंप दी जाए, लेकिन हिजबुल्ला ने इससे इनकार कर दिया।
लेबनान और इजराइल के बीच जून में एक समझौता हुआ था, जिसके तहत हिजबुल्ला को निरस्त्र किए जाने के साथ-साथ इजराइल को लेबनान से अपने सैनिक वापस बुलाने हैं। हिजबुल्ला इस वार्ता में शामिल नहीं था और उसने लितानी नदी के उत्तर में स्थित इलाकों में हथियार छोड़ने की मांग खारिज कर दी है। अली ताहेर पहाड़ी भी इसी क्षेत्र में स्थित है।
नबातियेह शहर के पास स्थित इस पहाड़ी को लेकर बड़े पैमाने पर लड़ाई छिड़ने से पूरे देश में संघर्ष तेज हो सकता है। लेबनान में अशांति से ईरान में जारी युद्ध के समाधान के प्रयास भी जटिल हो सकते हैं।
इजराइली सेना ने बृहस्पतिवार रात घोषणा की कि उसने अली ताहेर और उसके नीचे बनी सुरंगों के नेटवर्क पर ‘‘ऑपरेशनल कंट्रोल’’ (सैन्य कार्रवाई के लिहाज से नियंत्रण) हासिल कर लिया है। इजराइली सेना के अनुसार, हिजबुल्ला इन सुरंगों का इस्तेमाल अपने लड़ाकों और हथियारों को छिपाने के लिए करता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इजराइल का नियंत्रण कितने क्षेत्र तक है। लेबनान की सरकारी मीडिया के अनुसार, इजराइल की घोषणा से ठीक पहले तक उसकी वायुसेना पहाड़ी को निशाना बना रही थी।
इजराइल की घोषणा के बाद से हिजबुल्ला ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
हिजबुल्ला ने अली ताहेर को लेबनानी सेना को सौंपने के सरकार के प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया है। उसे आशंका है कि ऐसा करने पर इजराइल लेबनानी सेना से पहाड़ी पर नियंत्रण छीन सकता है और इसके बाद अन्य क्षेत्रों को भी सौंपने की मांग कर सकता है।
लेबनान से 2000 में पीछे हटने से पहले इजराइल का अली ताहेर पर 18 साल तक कब्जा था।
यह पहाड़ी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर है और यहां से कई गांवों एवं नबातियेह की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों पर नजर रखी जा सकती है। इस पर पूरा नियंत्रण खोने से इलाके में हिजबुल्ला की मौजूदगी और उसकी आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी।
इजराइली सेना का कहना है कि ईरान की वित्तीय मदद से हिजबुल्ला द्वारा यहां बनाई गई सुरंगों के कारण भी यह स्थान उसके लिए महत्वपूर्ण है।
इजराइल ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा कि पहाड़ी पर भूमिगत कमान केंद्र, हथियार रखने के कमरे, जनरेटर, रहने के स्थान, स्नानघर और रसोई मौजूद हैं। उसने कहा कि अली ताहेर से हिजबुल्ला के लड़ाकों को हटा दिया गया है और भूमिगत सैन्य ढांचे को निष्क्रिय करने का काम जारी है।
रूस के सरकारी वित्तपोषण वाले समाचार संस्थान ‘स्पूतनिक’ के अरबी संस्करण के अनुसार, हिजबुल्ला सांसद इहाब हमादेह ने सवाल किया कि यदि इजराइली सेना ने वास्तव में इलाके पर नियंत्रण हासिल कर लिया है तो वह अब भी पहाड़ी पर हमले क्यों कर रही है।
एपी सिम्मी अविनाश
अविनाश