आधे से अधिक बच्चे एवं किशोर निजी कारणों से कर रहे हैं एआई का इस्तेमाल

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आधे से अधिक बच्चे एवं किशोर निजी कारणों से कर रहे हैं एआई का इस्तेमाल

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 04:58 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 04:58 PM IST

(तामा लीवर, कर्टिन विश्वविद्यालय)

पर्थ, छह अगस्त (द कन्वरसेशन) इस सप्ताह जारी किये गये नए डेटा से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया के 54 प्रतिशत बच्चे और किशोर निजी एवं सामाजिक कारणों से कृत्रिम मेधा (एआई) उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसमें व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर सलाह लेना, भावनाओं के बारे में चर्चा करना और किशोरों के लिए भूमिका निभाने तथा रोमांटिक बातचीत जैसे प्रयोग करना भी शामिल है।

जटिल स्थितियों से गुजरना एवं उनसे निपटना (बच्चों की) इस बढ़ती उम्र का एक सामान्य हिस्सा है। लेकिन जहां एआई नए मौके देता है, वहीं यह नए जोखिम भी पैदा करता है।

तो माता-पिता और बड़ों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

बच्चों और किशोरों द्वारा एआई का इस्तेमाल

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इस साल फरवरी और मार्च में ‘ई-सेफ्टी’ आयुक्त ने 10 से 17 साल तक के 1,950 ऑस्ट्रेलियाई बच्चों/किशोरों का सर्वेक्षण किया, जिन्हें उनके माता-पिता के जरिए ऑनलाइन चुना गया था। सर्वेक्षण के नतीजों से पता चला कि 78 प्रतिशत बच्चों और किशोरों ने चैटजीपीटी, जेमिनी या क्लाउड जैसे एआई सहायकों (असिस्टेंट) का इस्तेमाल किया था।

एआई सहायकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से लिखने, संपादन करने और जानकारी जुटाने जैसे कामों में मदद करने वाले एक व्यावहारिक उपकरण के तौर पर किया जाता है। इस समूह के लगभग 20 प्रतिशत लोग रोज़ाना एआई उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। लेकिन ज़्यादा निजी कामों के लिए भी इनका इस्तेमाल आम है।

सामाजिक और व्यक्तिगत कारणों से एआई का इस्तेमाल करने वाले 54 प्रतिशत लोगों में से 33 प्रतिशत ने शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह लेने के लिए एआई का सहारा लिया, जबकि 33 प्रतिशत ने किसी विशेष परिस्थिति में क्या करना चाहिए, इस बारे में सलाह मांगी। वहीं, 20 प्रतिशत लोगों ने अपने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित सुझावों के लिए एआई से मदद ली।

लगभग 10 प्रतिशत किशोरों, जो एक उल्लेखनीय संख्या है, ने एआई साथी (कंपेनियन) का भी इस्तेमाल किया। ये ऐसे एआई उपकरण हैं, जो विभिन्न प्रकार की अपेक्षाकृत लंबे समय तक चलने वाली भूमिका निभाने वाली बातचीत का अनुकरण करते हैं। उनमें रोमांटिक बातचीत भी शामिल है।

दिव्यांग बच्चों और एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय से जुड़े युवाओं की अन्य बच्चों की तुलना में एआई साथी के साथ अधिक जुड़ने की संभावना रहती है।

निजता जोखिम

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रिपोर्ट में बच्चों और किशोरों के एआई इस्तेमाल से जुड़ी निजता चिंताओं पर ज़ोर दिया गया है।

जब बच्चे और किशोर सेहत से जुड़ी सलाह लेने या अपनी भावनाओं के बारे में बातचीत करने के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं, तो अक्सर वे अपनी निजी जानकारी बता देते हैं। ‘ईसेफ्टी’ की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल लगभग एक-तिहाई लोगों ने एआई को अपनी निजी जानकारी दी थी।

हालांकि, एआई उपकरण में निजता से जुड़े जोखिम होते हैं, और टेक कंपनियों पर निजी जानकारी की सुरक्षा करने की वैसी कोई बाध्यता नहीं होती जैसी कि किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक पर होती है।

उदाहरण के लिए, एआई सहायक या साथी के साथ साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी को एआई मॉडल के अगले संस्करण के लिए प्रशिक्षण डेटा के तौर पर इकट्ठा किया जा सकता है।

सरकार इन गोपनीयता जोखिमों से अवगत है। ‘चिल्ड्रन्स ओनली प्राइवेसी कोड’ इस दिसंबर में लागू होने वाला है और यह संभवतः ऐसी कुछ गोपनीयता अपेक्षाओं को तय करेगा जो एआई उपकरण तक फैली होंगी।

हानिकारक संपर्क

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एआई से बच्चे और किशोर हानिकारक सामग्री के संपर्क में भी आ सकते हैं।

ई-सेफ्टी के सर्वेक्षण में पाया गया कि 20 प्रतिशत बच्चों और किशोरों ने एआई उपकरणों के साथ संभावित रूप से हानिकारक या अनुचित बातचीत की सूचना दी। इसमें ऐसे चैटबॉट्स या साथी शामिल थे जो उपयोगकर्ताओं के प्रति रूखा व्यवहार कर रहे थे, लोगों के विशिष्ट जनसांख्यिकीय समूहों के बारे में नफरत भरी बातें कह रहे थे, और विभिन्न तरीकों से उपयोगकर्ताओं को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे।

यह जानना कि कुछ विचार कब हानिकारक या नकारात्मक हो सकते हैं, अक्सर प्रत्येक व्यक्ति के संदर्भ और परिस्थितियों को समझने पर निर्भर करता है।

एआई उपकरण यह नहीं समझते कि उनके जवाब तथ्यात्मक हैं या नहीं, वे केवल यह देखते हैं कि वे कितने तर्कसंगत प्रतीत होते हैं।

इससे एआई द्वारा ‘बुलिंग’ वाली भाषा या अन्य नकारात्मक प्रतिक्रियाओं को दोहराने की नौबत आ सकती है, केवल इसलिए क्योंकि ऐसे आदान-प्रदान (संवाद) उस डेटा में मौजूद होते हैं जिन पर एआई उपकरण (टूल्स) को प्रशिक्षित किया गया था।

एआई भ्रामक हो सकता है

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एआई के उपयोग से जुड़े अन्य जोखिम भी हैं जिनके बारे में माता-पिता और बच्चों को अवगत होना चाहिए।

शोध से पता चलता है कि एआई प्रणालियां अत्यधिक चापलूसी करने वाली होती हैं। इसका मतलब है कि वे आम तौर पर इस बात की परवाह किए बिना कि यह सटीक है या नहीं, उपयोगकर्ता के दृष्टिकोण से सहमत होती हैं और उसे पुष्ट करती हैं। यह युवाओं के दृष्टिकोण को विकृत कर सकता है और उनके गलत फैसलों को बढ़ावा दे सकता है।

वर्तमान एआई उपकरण नियमित रूप से जानकारी गढ़ते हैं। उद्योग जगत इस तरह के आउटपुट को ‘भ्रम’ कहकर इसका बचाव करता है।

लेकिन एआई न तो जीवित है, और न ही किसी भी मानवीय अर्थ में वास्तव में बुद्धिमान है। यह बात ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये उपकरण गड़बड़ी करते हैं या सिर्फ गलतियां करते हैं, खासकर तब जब व्यक्तिगत जानकारी दी जा रही हो या जब मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए इन उपकरण (टूल्स) का उपयोग किया जा रहा हो।

(द कन्वरसेशन) राजकुमार पवनेश

पवनेश